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    पाकिस्तानी सेना की फायरिंग से PoK में मचा हड़कंप, 6 लोगों की गई जान

    रावलकोट: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) के रावलकोट शहर से मानवाधिकारों के हनन और भारी नागरिक हिंसा की एक बेहद ही खौफनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है। रावलकोट में पिछले कई दिनों से चल रहा आंतरिक गतिरोध और तनाव मंगलवार को उस समय चरम पर पहुंच गया, जब पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों पर बल प्रयोग करते हुए सीधी कार्रवाई शुरू कर दी।

    प्रशासनिक दमन के विरोध में स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच शहर के नए बस टर्मिनल के समीप एक बार फिर हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग (गोलीबारी) कर दी। सेना की इस बर्बर कार्रवाई में 6 स्थानीय नागरिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस खूनी संघर्ष के बाद से पूरे रावलकोट और आसपास के जिलों में इस्लामाबाद प्रशासन के खिलाफ जनआक्रोश और नाराजगी सातवें आसमान पर पहुंच गई है।

    मृतकों की हुई पहचान; बस टर्मिनल पर वाजिद हयात समेत चार युवाओं ने मौके पर ही तोड़ा दम

    रावलकोट: स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों की सीधी गोलीबारी का शिकार हुए निर्दोष नागरिकों की शिनाख्त कर ली गई है:

    • मारे गए नागरिकों के नाम: इस हिंसक झड़प में जान गंवाने वाले प्रमुख लोगों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात शामिल हैं।

    • बस टर्मिनल पर बिछी लाशें: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वाजिद हयात को रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल के पास बेहद करीब से गोली मारी गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस ताजा और भयावह हिंसा ने पूरे क्षेत्र के सुरक्षा परिदृश्य को हिलाकर रख दिया है। स्थानीय लोग अपने परिजनों के शवों को सड़क पर रखकर पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के जनविरोधी रवैये के खिलाफ उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं।

    व्हाइट हाउस के बाहर गूंजी PoK के नागरिकों की आवाज; वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग

    रावलकोट: इस क्षेत्र में जारी दमन चक्र की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है। रावलकोट में हुई इस ताजा हिंसा से ठीक एक दिन पहले अमेरिका की राजधानी में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला था:

    • अमेरिका में प्रदर्शन: अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) समुदाय के प्रवासी लोग बड़ी संख्या में वाशिंगटन डीसी स्थित 'व्हाइट हाउस' (अमेरिकी राष्ट्रपति आवास) के बाहर एकत्रित हुए।

    • मानवीय संकट पर ध्यान खींचने का प्रयास: इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और समुदाय के शीर्ष नेताओं समेत लगभग 100 से अधिक लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर PoK में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों और वहां तेजी से बिगड़ते गंभीर मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) की ओर वैश्विक महाशक्तियों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित करने की पुरजोर मांग की।

    नागरिक इलाकों से पाकिस्तानी सेना को हटाने की मांग; 40 लाख लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क कटा

    रावलकोट: वाशिंगटन में प्रदर्शन कर रहे कश्मीरियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से पाकिस्तान सरकार पर कड़ा दबाव बनाने की मांग की है:

    • सेना की वापसी की मांग: प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से अपील की है कि वे दखल देकर पाकिस्तानी सेना को तत्काल प्रभाव से PoK के सभी नागरिक और रिहायशी इलाकों से पूरी तरह बाहर खदेड़ें। उन्होंने निहत्थे और बेकसूर नागरिकों पर घातक हथियारों और सेना के बल प्रयोग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।

    • डिजिटल ब्लैकआउट का मुद्दा: इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने पिछले लंबे समय से इलाके में लागू इंटरनेट शटडाउन (डिजिटल ब्लैकआउट) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका दावा है कि इंटरनेट और संचार माध्यम पूरी तरह ठप होने के कारण PoK की लगभग 40 लाख की आबादी पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट गई है, जिससे वहां की वास्तविक स्थिति दुनिया के सामने नहीं आ पा रही है।

    स्थानीय नागरिकों ने भारत सरकार से लगाई गुहार; कहा—जान बचाने और मानवीय मदद के लिए आगे आए नई दिल्ली

    रावलकोट: इस चरमपंथ और सैन्य दमन के बीच PoK के स्थानीय नागरिकों का धैर्य पूरी तरह से टूट चुका है, जिसके बाद उन्होंने एक बेहद ही ऐतिहासिक और अनोखी अपील जारी की है:

    • भारत से दखल की उम्मीद: रावलकोट और आसपास के पीड़ित स्थानीय नागरिकों ने सीधे तौर पर भारत सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप (दखल) करने की भावुक गुहार लगाई है।

    • मांगी मानवीय सहायता: स्थानीय नेताओं और नागरिकों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना उनके वजूद को मिटाने पर तुली है, ऐसे में केवल भारत ही उनकी जान बचा सकता है। उन्होंने नई दिल्ली से मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के जरिए उनके पास जीवन रक्षक दवाएं, खाद्य सामग्री और मानवीय राहत पहुंचाई जाए ताकि उन्हें इस नरसंहार से बचाया जा सके। इस अपील के बाद से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।

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