लक्ष्मणगढ़ में घाट कैनाल पर करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं मिला सिंचाई का पानी, किसानों ने अतिक्रमण और अधूरे निर्माण को बताया बड़ी वजह
लक्ष्मणगढ़। कठूमर और लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की जीवनरेखा मानी जाने वाली घाट कैनाल पिकअप वियर पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद किसानों को आज तक सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल सका है। वर्षों से चली आ रही इस समस्या के कारण क्षेत्र के किसान निराश हैं और इसे प्रमुख जनसरोकार का मुद्दा बता रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पहले घाट कैनाल से लक्ष्मणगढ़ और कठूमर क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक बांधों में पानी पहुंचता था, जिससे खेती और भूजल स्तर दोनों को लाभ मिलता था। लेकिन समय के साथ नहरों पर अतिक्रमण, क्षतिग्रस्त संरचना और रखरखाव की कमी के कारण पानी का प्रवाह बंद हो गया और अधिकांश पानी सीधे भरतपुर की ओर जाने लगा।
वर्ष 2012 में घाट कैनाल पिकअप वियर की मरम्मत, नहरों के नवीनीकरण और लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 37 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। सिंचाई विभाग ने पिकअप वियर का नवीनीकरण और कुछ नहरों का निर्माण कराया, लेकिन किसानों का आरोप है कि अधूरे कार्य और निर्माण में अनियमितताओं के कारण आज तक क्षेत्र को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
किसानों का कहना है कि पूर्व में जनप्रतिनिधियों द्वारा भी विधायक निधि से नहरों पर कार्य कराया गया, लेकिन बरसात के मौसम में भी लक्ष्मणगढ़ के बांधों तक पानी नहीं पहुंच पाया।
क्षेत्र के किसानों के अनुसार नटनी के बारां से रूपारेल नदी का पानी घाट कैनाल तक पहुंचता है। यहां से एक मार्ग लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बांधों की ओर जाता है, जबकि दूसरा भरतपुर की ओर निकलता है।
घाट से चंद्रा माइनर तक पानी एक ही नहर से पहुंचता है और वहां से यह जावली तथा मौजपुर-लक्ष्मणगढ़ की ओर विभाजित होता है। वर्तमान में दोनों नहरें अधिकांश समय सूखी रहती हैं।
किसान नेता असलम खान, गंगा लहरी प्रजापत, विक्रम सिंह और मोहम्मद रफीक खान ने बताया कि गत वर्ष प्रशासन के सहयोग से जेसीबी की सहायता से घाट कैनाल पिकअप से चंद्रा माइनर तक अवरुद्ध जल निकासी मार्ग को साफ कराया गया था। हालांकि पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण बांधों में पानी नहीं पहुंच सका।
उन्होंने कहा कि यदि घाट कैनाल के गेट खुलने के दौरान प्रशासन सक्रिय निगरानी रखे और नहरों को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखे, तो इस वर्ष क्षेत्र के बांधों में पानी पहुंचने की संभावना बन सकती है।
किसानों का कहना है कि घाट कैनाल का पानी लक्ष्मणगढ़ तक पहुंचाने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
किसान नेता गंगा लहरी प्रजापत ने बताया कि बांधों में पानी नहीं पहुंचने के कारण क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। कई स्थानों पर बोरवेल की क्षमता भी कम हो रही है, जिससे खेती और पेयजल दोनों पर संकट गहराता जा रहा है।
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