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    बांग्लादेश में हिंदू युवक की गिरफ्तारी पर सियासी और सामाजिक हलचल, अल्पसंख्यकों का प्रदर्शन जारी

    ढाका बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की गिरफ्तारी के विरोध में राजधानी ढाका में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने भारी आक्रोश व्यक्त किया है। 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के बैनर तले नेशनल प्रेस क्लब के सामने आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हरिदास चंद्र तरणी दास को एक फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाकर गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि यह पूरी कार्रवाई केवल इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके में भगवान राम की 81 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने का बीड़ा उठाया था।

    गिरफ्तारी को बताया अन्यायपूर्ण और राजनीति से प्रेरित

    परिषद के महासचिव मणिंद्र कुमार नाथ ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो-तीन दिन पहले हरिदास को जेल भेज दिया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि प्रतिमा निर्माण जैसे धार्मिक कार्य से जुड़े होने के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना बनाना कानून का दुरुपयोग है।

    अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता

    प्रदर्शन के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने पिछले दो वर्षों में देश भर में अपने समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता जताई। मणिंद्र कुमार नाथ ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में ही देशभर में करीब 3,000 उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 66 लोगों की हत्या हुई और अनेक मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। उन्होंने इन घटनाओं को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि इन्हें और अधिक सहन नहीं किया जाएगा।

    सरकार को दी कड़े आंदोलन की चेतावनी

    परिषद के वरिष्ठ नेता सुब्रत चौधरी ने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर किस अधिकारी के निर्देश पर यह गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करे। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हरिदास चंद्र तरणी दास को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय मिलकर राष्ट्रव्यापी बड़े आंदोलन का आह्वान करेंगे।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी है चिंता का विषय

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले महीने ही गाइबांधा में भगवान राम की प्रतिमा के कथित अपमान को लेकर स्थिति तनावपूर्ण थी। इस पूरे मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। इससे पूर्व 23 जून को भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक प्रतीकों के अपमान की खबरों पर चिंता जताई थी। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए कट्टरपंथी तत्वों पर नकेल कसने और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।

    क्या आप इस मुद्दे से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं या हालिया घटनाक्रमों के बारे में और जानकारी चाहते हैं?

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