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    ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा पर उठे सवाल, रोहित पवार ने लगाया पेपर लीक का आरोप

    मुंबई: देशभर में परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच अब महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी एमपीएससी की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने और भारी गड़बड़ी के गंभीर मामले सामने आए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट के प्रमुख नेता रोहित पवार ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि इस परीक्षा का प्रश्नपत्र 12 लाख रुपये में बेचा गया था, जिसमें से पांच लाख रुपये एडवांस के तौर पर वसूले जाने की बात कही गई है।

    नायब तहसीलदार के बच्चों के चयन पर उठे गंभीर सवाल

    इस पूरे प्रकरण को लेकर एनसीपी नेता ने दावा किया है कि इस धांधली में एक नायब तहसीलदार के बेटे और बेटी का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। उनके मुताबिक, दोनों भाई-बहन इस परीक्षा में सफल घोषित किए गए हैं, जहां बेटे को 13वीं रैंक और 149 अंक मिले हैं, वहीं बेटी ने 16वीं रैंक हासिल करते हुए 148 अंक प्राप्त किए हैं। इन तमाम संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से कराने की मांग की है।

    भर्ती प्रक्रिया का पूरा घटनाक्रम और आयोग की कार्रवाई

    विवादों में घिरी यह ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा बीते 22 मार्च को ऑफलाइन माध्यम से आयोजित की गई थी, जिसके परिणाम 12 जून को घोषित किए गए थे। इसके बाद 1 से 21 जुलाई के बीच इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी हुई और 22 जुलाई को फाइनल सिलेक्शन लिस्ट जारी कर दी गई। एमपीएससी के उच्च सूत्रों के अनुसार, अंतिम सूची आने के ठीक अगले दिन यानी 23 जुलाई को आयोग को एक ईमेल के जरिए यह शिकायत मिली कि परीक्षा के सवाल लीक हुए थे, जिसके बाद आयोग ने त्वरित कदम उठाते हुए शिकायतकर्ता को तमाम सबूतों के साथ पूछताछ के लिए तलब किया।

    शिकायतकर्ता के यू-टर्न और ईमेल से उलझी जांच की गुत्थी

    इस हाई-प्रोफाइल मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब रविवार की रात उसी शिकायतकर्ता ने आयोग को एक और नया ईमेल भेजकर अपनी ही पहली शिकायत को फर्जी करार दे दिया। नए ईमेल में यह तर्क दिया गया है कि जल्द दोबारा परीक्षा होने की कोई संभावना नहीं दिख रही थी, इसलिए पेपर लीक की झूठी कहानी गढ़ी गई थी। बहरहाल, 20 मार्च की कथित बातचीत की बात सामने आने के बावजूद जुलाई में इतनी लंबी देरी से शिकायत दर्ज कराने और फिर अचानक यू-टर्न लेने जैसे तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आयोग और संबंधित एजेंसियां आज सभी पक्षों से गहन पूछताछ कर रही हैं।

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