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    आस्था की मिसाल: 70 दिन की कांवड़ यात्रा पर निकली महिला, हर कदम पर मिल रहा सम्मान

    इंदौर: मध्य प्रदेश की धार्मिक धरा पर शिव भक्ति का एक अनोखा और मिसाल पेश करने वाला रूप देखने को मिल रहा है। चंबल अंचल के भिंड जिले में स्थित अति प्राचीन वनखंडेश्वर मंदिर से पैदल यात्रा पर निकलीं महिला श्रद्धालु वंदना राठौर इंदौर शहर पहुंचीं। अपने कंधे पर भगवान शिव की 11 किलोग्राम वजनी प्रतिमा उठाकर चल रहीं वंदना के अटूट संकल्प और भक्ति भाव को देखकर स्थानीय लोग और राहगीर दंग रह गए।

    70 दिनों में 700 किलोमीटर का विशाल लक्ष्य

    अपनी इस कठिन आध्यात्मिक यात्रा के बारे में बात करते हुए वंदना राठौर ने बताया कि उन्होंने 17 जून को भिंड से पैदल चलना शुरू किया था। उनका संकल्प 70 दिनों के भीतर लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय करने का है। इंदौर में पड़ाव डालने के बाद, लगभग 2 महीने और 10 दिन का सफर पूरा करके यह यात्रा वापस भिंड पहुंचकर पूर्ण आहुति के साथ समाप्त होगी। जब वे भारी शिव प्रतिमा को कंधे पर थामे इंदौर की सीमा में दाखिल हुईं, तो स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया।

    सावन के पावन माह में उमड़ता भक्ति का सैलाब

    पवित्र सावन महीने में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। वंदना की इस यात्रा में मुरैना के रहने वाले नितिन शर्मा भी सहभागी बने हैं। दोनों ही भक्त विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के दर्शन करने की अभिलाषा लेकर आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा की सबसे खास बात यह है कि वंदना पूरी राह 11 किलोग्राम की शिव प्रतिमा को लगातार अपने कंधे पर ही धारण किए हुए हैं।

    मुरैना से 500 किलोमीटर का अनवरत सफर

    मुरैना निवासी नितिन शर्मा ने अपनी यात्रा के संबंध में बताया कि उन्होंने मुरैना से लगभग 500 किलोमीटर का सफर पैदल तय करने का व्रत लिया है। उनकी इस तपस्या को आज 48 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में बाबा महाकाल के पावन दर्शन और पूजन के उपरांत वे सीधे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे।

    प्रतिदिन तय होती है 10 से 23 किलोमीटर की दूरी

    अपनी दैनिक यात्रा के दिनक्रम पर प्रकाश डालते हुए वंदना ने साझा किया कि वह रोज औसतन 10 से 23 किलोमीटर तक पैदल चलती हैं। इतनी भारी प्रतिमा को लगातार कंधे पर टिकाए रखना उनकी अगाध आस्था का प्रतीक है। कुल 70 दिनों में पूरी होने वाली इस यात्रा के दौरान राह में मिलने वाले विभिन्न मंदिरों और स्थानीय शिवभक्तों द्वारा उनके ठहरने व भोजन का प्रबंध श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है। उज्जैन में महाकालेश्वर के दर्शन करने के बाद वंदना भी ओंकारेश्वर में भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने जाएंगी।

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