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    सिर्फ 8 महीने में बड़ा उलटफेर, कैसे बीजेपी का अभेद्य गढ़ जीत गए प्रशांत किशोर?

    पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणामों ने राज्य के सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने इस मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार से अधिक मतों के बड़े अंतर से शिकस्त देकर अपनी पहली चुनावी जीत हासिल की। वहीं, इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और वह तीसरे स्थान पर खिसक गया।

    आठ महीने में बदला चुनावी परिदृश्य

    यह परिणाम इसलिए बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि नवंबर 2025 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर भाजपा ने लगभग 52 हजार वोटों से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। हालांकि, महज आठ महीने के भीतर ही चुनावी हवा पूरी तरह बदल गई। विश्लेषक इस बड़े उलटफेर के पीछे पांच मुख्य वजहें मान रहे हैं:

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर सवाल

    बिहार की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में यह भाजपा की पहली बड़ी परीक्षा थी। प्रशांत किशोर ने पूरे प्रचार अभियान को सीधे अपने और मुख्यमंत्री के बीच के मुकाबले के रूप में पेश किया। जीत के बाद PK ने कहा कि बांकीपुर की जनता ने भाजपा नेतृत्व को साफ संदेश दे दिया है कि प्रदेश को अब नए और बेहतर नेतृत्व की दरकार है।

    तीन दशकों का मजबूत गढ़ और सत्ता विरोधी लहर

    बांकीपुर सीट पर 1995 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा था। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके पुत्र नितिन नवीन यहां का प्रतिनिधित्व करते आए। लगभग 30 सालों से एक ही परिवार और पार्टी के पास सीट रहने के कारण स्थानीय स्तर पर गहरा असंतोष और सत्ता विरोधी लहर पनप चुकी थी, जिसका सीधा फायदा जन सुराज को मिला।

    बुनियादी नागरिक समस्याओं पर फोकस

    चुनावी रैलियों में बड़े दावों और भारी-भरकम वादों के बजाय प्रशांत किशोर ने सड़क, सफाई, नाली और स्थानीय नागरिक सुविधाओं जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने जनता को व्यावहारिक बदलाव का आश्वासन दिया, जिसे मतदाताओं ने काफी पसंद किया।

    राजद के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी

    राजनीतिक पंडितों के अनुसार, राजद का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण इस बार पूरी तरह बिखर गया। भाजपा को परास्त करने की होड़ में मुस्लिम मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने जन सुराज का रुख किया। नतीजतन, राजद तीसरे स्थान पर आ गया और उसके प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई।

    भाजपा के सवर्ण वोट बैंक में बिखराव

    भाजपा के पारंपरिक सवर्ण जनाधार में भी सेंध देखने को मिली। बांकीपुर क्षेत्र में कायस्थ, ब्राह्मण और भूमिहार मतदाताओं की अच्छी-खासी मौजूदगी है। प्रशांत किशोर के खुद ब्राह्मण समाज से आने और स्थानीय असंतोष के चलते सवर्ण वोट बैंक का एक हिस्सा भाजपा से छिटककर जन सुराज के पाले में चला गया।

    भाजपा के लिए भविष्य के संकेत

    राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई यह सीट पिछले 31 वर्षों से भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती थी। ऐसे में अपने ही गढ़ में मिली यह करारी हार भाजपा के लिए सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं है, बल्कि यह आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़े बदलाव की आहट है।

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