बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। बिजनौर जनपद के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव बनखला की एक मस्जिद में बने प्राचीन कुएं के ऊपर निर्मित शौचालय और स्नानागार (बाथरूम) को हटाए जाने के उपरांत, शुक्रवार को वहां लगभग तीन फीट गहरी खोदाई का कार्य संपन्न कराया गया। इस खोदाई के दौरान जमीन के भीतर एक सीमेंटेड स्लैब बरामद हुआ है।
स्लैब के नीचे प्राचीन कुएं की संभावना
इस बात की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है कि इसी सीमेंटेड स्लैब के नीचे वह प्राचीन कुआं दबा हुआ है, जिसे पूर्व में स्लैब डालकर पाटा गया था। इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता अशोक त्यागी ने प्रशासन से मांग की है कि इस स्थान पर अभी और अधिक गहराई तक खोदाई कराई जानी चाहिए, ताकि कुएं के अस्तित्व का पूर्ण सत्य सामने आ सके।
शिकायत और प्रशासनिक निरीक्षण का घटनाक्रम
गत आठ सितंबर को लक्खूवाला ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव बनखला में स्थित इस मस्जिद के नीचे प्राचीन कुआं होने की आधिकारिक शिकायत जिला मजिस्ट्रेट (DM) तथा पुलिस अधीक्षक (SP) से की गई थी। इसके उपरांत, पुलिस और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संपूर्ण प्रकरण की प्राथमिक जांच की थी।
इस दौरान हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा और जिला अध्यक्ष दीक्षित त्यागी ने उस मस्जिद के भीतर हनुमान चालीसा का पाठ करने का खुला ऐलान कर दिया था। इस संवेदनशील घोषणा के मद्देनजर गत मंगलवार को बनखला गांव को एक प्रकार से पुलिस छावनी में परिवर्तित कर दिया गया था। हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच का ठोस आश्वासन दिए जाने के पश्चात उस धार्मिक पाठ के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया था।
इससे पूर्व 18 सितंबर को स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक को एक लिखित शिकायत सौंपी थी। शिकायतकर्ताओं का दावा था कि यह कुआं कई दशकों पुराना है तथा वर्ष 1966 के राजस्व अभिलेखों (रिकॉर्ड) में भी इसका स्पष्ट उल्लेख दर्ज है। उनका मुख्य आरोप था कि वर्ष 2014 में मस्जिद के निर्माण के समय इस प्राचीन कुएं को अवैध रूप से मस्जिद परिसर के भीतर शामिल कर लिया गया था।
मस्जिद कमेटी द्वारा स्वयं निर्माण तोड़ा जाना
इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद 22 सितंबर को नगीना के उपजिलाधिकारी (SDM) प्रिंस कुमार और क्षेत्राधिकारी (CO) राजेश सोलंकी ने पुलिस तथा राजस्व विभाग की संयुक्त टीम के साथ मौके पर पहुंचकर मस्जिद का स्थलीय निरीक्षण किया था। उसी समय अधिकारियों ने स्थल पर खोदाई करवाकर वास्तविकता की जांच करने की संभावना जताई थी। इसके परिणामस्वरुप, 23 सितंबर की रात्रि को मस्जिद कमेटी ने स्वयं ही पहल करते हुए वहां बने शौचालय और स्नानागार को तोड़ना आरंभ कर दिया था। साथ ही, कुएं को मस्जिद परिसर की सीमा से बाहर करने के उद्देश्य से एक दीवार को भी गिरा दिया गया था।
शुक्रवार को पुलिस और राजस्व प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की सीधी मौजूदगी में मस्जिद परिसर के भीतर तोड़े गए शौचालय एवं बाथरूम के निचले हिस्से की खोदाई कराई गई। इस खोदाई के दौरान जमीन से लगभग तीन फीट की गहराई पर एक मोटा सीमेंटेड स्लैब मिला है।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्लैब के नीचे ही वह प्राचीन कुआं सुरक्षित है, जिसे पाट दिया गया था। इस संबंध में शिकायतकर्ता अशोक त्यागी का कहना है कि जिस विशिष्ट स्थान पर यह स्लैब प्राप्त हुआ है, उसी बिंदु पर प्रशासन को और गहराई से खोदाई करवानी चाहिए, क्योंकि प्राचीन कुआं इसी स्थान पर स्थित है।
दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधि फहीम अहमद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि लगभग तीन फीट की खोदाई में अभी तक कोई भी कुआं नहीं मिला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुएं से संबंधित जो शिकायत उठाई गई थी, उस पर दूसरे पक्ष की सहमति के आधार पर स्वयं ही अनधिकृत निर्माण को तोड़कर हटा दिया गया है। वर्तमान में दोनों पक्षों के मध्य आपसी समझौता और सहमति बन चुकी है, इसलिए अब प्रशासन की ओर से किसी अन्य रिपोर्ट या कार्रवाई की आवश्यकता शेष नहीं रही है।


