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    विश्व कप विजेताओं के लिए खास तोहफा, डॉ. सक्का ने बनाए दुनिया के सबसे छोटे गोल्डन बूट

    उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सूक्ष्म स्वर्ण शिल्पी और अनगिनत वैश्विक कीर्तिमान अपने नाम करने वाले डॉ. इक़बाल सक्का ने एक बार फिर अपनी बेजोड़ कारीगरी से पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया है। उन्होंने खेल जगत के सबसे बड़े महाकुंभ यानी फीफा विश्व कप 2026 को ध्यान में रखते हुए अपनी सूक्ष्म कला का प्रदर्शन किया है। डॉ. सक्का ने अपनी जादुई उंगलियों के हुनर से विश्व के सबसे छोटे और आकर्षक स्वर्ण, रजत व कांस्य बूट सहित एक सूक्ष्म फुटबॉल का निर्माण किया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।

    राई और अंजीर के दाने के आकार में ढाली अद्भुत कलाकृतियां

    डॉ. सक्का द्वारा निर्मित ये बेशकीमती कलाकृतियां इतनी सूक्ष्म हैं कि इनका आकार महज एक राई और अंजीर के दाने के बराबर है। इन्हें आम मानवीय आंखों से सीधे देख पाना लगभग नामुमकिन है और इन्हें निहारने के लिए विशेष लेंस (माइक्रोस्कोप) की आवश्यकता पड़ती है। हाई-पावर लेंस की मदद से देखने पर एक सुंदर हरे रंग के कृत्रिम फुटबॉल मैदान पर करीने से सजे गोल्डन बूट, सिल्वर बूट, ब्रॉन्ज बूट और हवा में तैरती हुई एक अत्यंत सुंदर फुटबॉल पूरी तरह स्पष्ट और सजीव दिखाई देती है।

    सूक्ष्म कलाकृतियों के जरिए दुनिया को दिया विश्व शांति और सौहार्द का संदेश

    शिल्पी ने इस अद्वितीय कलाकृति के माध्यम से केवल खेल का सम्मान ही नहीं किया है, बल्कि इसके साथ वैश्विक भाईचारे की अनूठी मिसाल भी पेश की है। उन्होंने इन सूक्ष्म पुरस्कारों के साथ ही अत्यंत बारीक आकार में सात रंगों वाला विश्व शांति का इंद्रधनुषी ध्वज, शान से लहराता भारतीय तिरंगा और फीफा का आधिकारिक सफेद ध्वज भी तैयार किया है। डॉ. सक्का के मुताबिक इन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतीकों को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य भारत के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से पूरी दुनिया को शांति और खेल भावना का संदेश देना है।

    विजेता खिलाड़ियों को भारतीय खेल प्रेमियों की तरफ से भेंट करने का अनूठा प्रस्ताव

    इस नायाब हुनर को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए डॉ. सक्का ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। उनकी दिली ख्वाहिश है कि आगामी फुटबॉल विश्व कप में सर्वाधिक गोल दागने वाले शीर्ष तीन खिलाड़ियों को उनके आधिकारिक फीफा पुरस्कारों के साथ भारत की तरफ से यह अनूठी कलाकृतियां भी दी जाएं। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख स्थित फीफा मुख्यालय और नई दिल्ली में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को आधिकारिक पत्र भेजकर इस ऐतिहासिक पहल में सहयोग करने का विशेष अनुरोध किया है।

    211 विश्व रिकॉर्ड धारक स्वर्ण शिल्पी के नाम दर्ज हैं कई अद्वितीय उपलब्धियां

    यह पहली बार नहीं है जब डॉ. इकबाल सक्का ने अपनी जादुई शिल्पकला से देश का मान बढ़ाया है, बल्कि उनके नाम पहले से ही 211 प्रतिष्ठित विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं। इससे पूर्व भी वे महाप्रभु भगवान जगन्नाथ का दुनिया का सबसे छोटा सोने का रथ और कई अन्य सूक्ष्म देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का लोहा मनवा चुके हैं। यदि वैश्विक फुटबॉल नियामक संस्था फीफा द्वारा उनके इस सुंदर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो विश्व कप के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब भारतीय शिल्पकला का यह अद्भुत रूप दुनिया के महानतम खिलाड़ियों के हाथों की शोभा बढ़ाएगा।

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