More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशरायसेन में 40 साल बाद अनोखा रोमांच: महिलाओं की लाठियों के बीच...

    रायसेन में 40 साल बाद अनोखा रोमांच: महिलाओं की लाठियों के बीच 19 साल के निखिल ने 50 फीट ऊंचे खंभे पर फहराया परचम

    रायसेन: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बेगमगंज से एक बेहद ही रोमांचक और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां के ग्राम चांदबड़ में पूरे 40 साल बाद एक ऐसी अनोखी लोक परंपरा को दोबारा जिंदा किया गया है, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। कड़कती धूप, हाथों में लाठियां लिए महिलाओं की फौज और उनके बीच खड़ा 50 फीट ऊंचा एक बेहद चिकना खंभा—इस खंभे पर चढ़कर धर्म ध्वजा को फहराना कोई मामूली खेल नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालने जैसा काम है। लेकिन इस बेहद कठिन परीक्षा को पार कर एक 19 साल के युवा ने वो कर दिखाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है।

    40 साल बाद जिंदा हुई 'झिरआई फाग' की ऐतिहासिक परंपरा

    मृदंग की थाप, ढोलक की गूंज और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के बीच गूंजते लोकगीतों से चांदबड़ गांव का पूरा माहौल उत्सव में बदल गया। लुप्त हो चुकी ‘झिरआई फाग’ प्रतियोगिता का आयोजन स्थानीय विधायक देवेंद्र पटेल के चचेरे भाई वीर नारायण पटेल के संरक्षण में किया गया था। इस ऐतिहासिक और रोमांचक पल का गवाह बनने के लिए आसपास के करीब 25 गांवों की टोलियां और सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ चांदबड़ गांव में खिंची चली आई।

    जितना पारंपरिक, उतना ही कठिन और खतरनाक है यह खेल

    यह पारंपरिक खेल जितना देखने में मजेदार है, खेलने में उतना ही कठिन और खतरनाक भी है। खेल के नियमों के मुताबिक, मैदान के बीचों-बीच 50 से 60 फीट ऊंचा एक मोटा लकड़ी का खंभा गाड़ा जाता है। इस खंभे पर गेरू और खाने का तेल मलकर इसे इतना चिकना कर दिया जाता है कि इस पर पैर टिकाना भी नामुमकिन हो जाए। चुनौती सिर्फ यह चिकनाई नहीं है, बल्कि असली परीक्षा तो खंभे के नीचे लाठियां तानकर खड़ी महिलाओं की टोली से पार पाना है।

    मैदान में लाठियों की बौछार और पुरुषों का बचाव

    चिलचिलाती धूप में जैसे ही कीर्ति ध्वजा के पूजन के बाद प्रतियोगिता शुरू हुई, पूरा मैदान मानो जंग के मैदान में बदल गया। एक-एक कर पुरुषों की टोलियों ने खंभे की तरफ बढ़ना शुरू किया। पुरुष अपने हाथों में ‘T’ आकार की लकड़ी लेकर महिलाओं की लाठियों से खुद का बचाव कर रहे थे, तो दूसरी तरफ लंबी-लंबी लाठियां लिए महिलाओं की टोलियां उन पर लगातार प्रहार कर रही थीं। लाठियों की इस मार से बचने के चक्कर में कई पुरुषों के पैर फिसले और वे चोटिल भी हुए, लेकिन रोमांच से भरा यह खेल थमा नहीं।

    19 साल के जांबाज निखिल ने लाठियां सहकर तोड़ी ध्वजा

    करीब दो घंटे तक मैदान में यह कड़ा संघर्ष और जद्दोजहद चलती रही। तभी मैदान में 19 साल के साहसी युवक निखिल रैकवार की एंट्री हुई। महिलाओं की लाठियों की भारी मार सहने के बाद भी निखिल के हौसले नहीं डगमगाए। वह रेंगते और फिसलते हुए, आखिरकार उस 50 फीट ऊंचे चिकने खंभे के सबसे ऊपर पहुंच गया। एक जोरदार झटके के साथ उसने वहां बंधी धर्म ध्वजा और प्रसाद की पोटली को तोड़ दिया।

    निखिल के झंडा तोड़ते ही पूरा चांदबड़ गांव तालियों और जयकारों की गूंज से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक जीत पर मुख्य अतिथि और क्षेत्रीय विधायक देवेंद्र पटेल ने मंच पर बुलाकर जांबाज निखिल रैकवार का तिलक लगाया, पुष्पमाला पहनाई और उन्हें निर्धारित 21 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर उनकी बहादुरी का सम्मान किया।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here