मिशनसच न्यूज, अलवर।
अलवर शहर के जयपुर रोड पर ढाई पैड़ी स्थित अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर का रजत जयंती समारोह आज पारंपरिक धार्मिक विधानों के साथ प्रारंभ हुआ। मंदिर में प्रतिष्ठित आदिनाथ भगवान की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह भव्य समारोह दो दिनों तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के पहले दिन मंदिर परिसर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरा रहा।
आज के आयोजन की शुरुआत श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा और नित्यनियम पूजन से हुई। इसके बाद भक्तामर विधान का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर जैन धर्म की गहन भक्ति और परंपराओं का पालन किया। केसरिया धोती-दुपट्टा धारण किए श्रद्धालु जब अभिषेक कर रहे थे तो पूरा अहिंसा स्थल “आदिनाथ भगवान के जयकारों” से गूंज उठा।
इस अवसर पर अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर के संस्थापक बच्चू सिंह जैन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि शीघ्र ही मंदिर के सभागार में अलवर के सभी दिगम्बर जैन मंदिरों के डिजिटल चित्र लगाए जाएंगे। इससे अहिंसा स्थल आने वाले श्रद्धालु एक ही स्थान पर बैठकर पूरे शहर के दिगम्बर जैन मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने इसे शहरभर के जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया।
अहिंसा स्थल के प्रबंधक बच्चू सिंह जैन ने जानकारी दी कि मंदिर में विराजित आदिनाथ भगवान की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एक दिसम्बर को 25 वर्ष पूर्ण कर रही है। इसी उपलक्ष्य में दो दिवसीय रजत जयंती उत्सव आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान अलवर जिले के विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन, अध्यक्ष मुकेश कुमार जैन, प्रवीण गोधा और एडवोकेट राजेन्द्र कुमार जैन प्रमुख हैं।
कार्यक्रम के दूसरे दिन एक दिसम्बर को सुबह 7 बजे से श्रीजी का अभिषेक एवं नित्यमह पूजन होगा। इसके बाद सुबह 8:30 बजे 108 कलशों द्वारा आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का महामस्तिकाभिषेक किया जाएगा, जो इस पूरे समारोह का मुख्य आकर्षण रहेगा। जैन समुदाय में महामस्तिकाभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व होता है और इस अनुष्ठान में शामिल होने के लिए अलवर तथा आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
स्थानीय समाज ने अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर की इस पहल को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल समुदाय को एकजुट करते हैं बल्कि परंपराओं एवं आस्था को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनते हैं।
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