More
    Homeराज्यमध्यप्रदेश‘अशोक ट्रेवल्स’ बस जब्त, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालों का दबाव

    ‘अशोक ट्रेवल्स’ बस जब्त, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालों का दबाव

    नीमच। शहर में यात्री सुरक्षा को ताक पर रखकर लग्जरी बसों का व्यावसायिक माल ढोने के लिए उपयोग करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। प्रशासन ने इस दिशा में कड़ा रुख अपनाते हुए 'अशोक ट्रेवल्स' की एक बस के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसमें बस की छत पर क्षमता से कहीं अधिक भारी माल लादकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। हालांकि इस कार्रवाई के दौरान बस संचालकों ने अपने ऊंचे संपर्कों और रसूख का इस्तेमाल कर अधिकारियों पर दबाव बनाने की पुरजोर कोशिश की और कई जगह सिफारिशी फोन भी करवाए, परंतु कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों ने किसी की एक न सुनी और अंततः बस को जब्त कर लिया गया।

    यात्री बसों में अवैध माल ढुलाई और सुरक्षा से खिलवाड़

    लग्जरी बसों का मालगाड़ी के रूप में धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल अब यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गया है क्योंकि छत पर अत्यधिक वजन होने से दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ जाती है। अशोक ट्रेवल्स की बस पर हुई इस जब्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि किस तरह बस ऑपरेटर अधिक मुनाफे के लालच में सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर रहे हैं। प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब आम नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भविष्य में भी इसी तरह की निष्पक्ष कार्रवाई जारी रहेगी या यह केवल एक बार की दिखावटी कार्यवाही बनकर रह जाएगी।

    चुनिंदा कार्रवाई ने खड़े किए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

    एक विशेष ट्रेवल्स एजेंसी पर हुई इस कार्रवाई के बाद अब स्थानीय परिवहन विभाग और प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि शहर में कई अन्य ऑपरेटर भी इसी तरह के अवैध कार्यों में संलिप्त हैं। अजय ट्रेवल्स, गायत्री ट्रेवल्स, मुल्तानी सोना और कोठानी जैसी अन्य कई एजेंसियां भी अपनी बसों में क्षमता से अधिक व्यावसायिक माल ढो रही हैं, परंतु उनके विरुद्ध अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों के बीच यह संशय बना हुआ है कि आखिर अन्य ऑपरेटरों पर प्रशासन की यह 'विशेष मेहरबानी' क्यों बनी हुई है और क्या नियम केवल कुछ ही संचालकों के लिए सीमित हैं।

    भविष्य की निष्पक्ष जांच और व्यापक सुधार की उम्मीद

    सोशल मीडिया पर इस घटना के वायरल होने के बाद अब प्रशासन पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह 'पिक एंड चूज' की नीति छोड़कर सभी बस संचालकों के खिलाफ समान रूप से चाबुक चलाए। यदि प्रशासन वास्तव में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, तो उसे कोठानी, मुल्तानी सोना, अजय और गायत्री जैसे अन्य नामों पर भी शिकंजा कसना होगा ताकि 'फिक्स मंथली' के आरोपों को झुठलाया जा सके। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर पूरे परिवहन तंत्र में व्यापक सुधार लाने की हिम्मत जुटा पाता है या फिर यात्रियों की सुरक्षा इसी तरह रसूखदारों के आगे दांव पर लगी रहेगी।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here