जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर शहर स्थित प्रतिष्ठित डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के परिसर में रैगिंग और अनुशासनहीनता का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने बेहद कड़ा और अनुशासनात्मक कदम उठाया है। एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के जूनियर विद्यार्थियों के साथ सीनियर छात्रों द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और बदसलूकी की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कॉलेज की एंटी-रैगिंग समिति की औपचारिक सिफारिश के आधार पर कुल 19 सीनियर विद्यार्थियों को निलंबित कर दिया गया है। इन सभी आरोपित छात्रों में से 14 विद्यार्थियों को एक महीने की अवधि के लिए तथा पांच अन्य विद्यार्थियों को तीन महीने के लिए कॉलेज से सस्पेंड किया गया है। उच्च स्तरीय जांच के दौरान इन सभी विद्यार्थियों को रैगिंग और गंभीर अनुशासनहीनता की गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त पाया गया है।
जूनियर विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को भेजी गई शिकायत
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब एमबीबीएस सत्र के जूनियर विद्यार्थियों ने सीधे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को ईमेल के माध्यम से अपनी लिखित शिकायत भेजी। पीड़ित जूनियर छात्रों ने आरोप लगाया था कि उनके सीनियर छात्र जानबूझकर परिचय पूछने के बहाने उनके साथ बेहद अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। इसके साथ ही उन पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा था कि वे हॉस्टल और कॉलेज परिसर में घूमते समय अपने सीनियरों को 'बॉस' कहकर संबोधित करें। जूनियर छात्रों ने अपनी इस गोपनीय शिकायत में चार से पांच मुख्य आरोपित सीनियर विद्यार्थियों के विशिष्ट नामों का भी उल्लेख किया था। एनएमसी ने इस शिकायत को पूरी गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार की शाम ही इसकी आधिकारिक जानकारी जोधपुर मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेषित कर दी, जिसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।
एंटी-रैगिंग समिति द्वारा जांच, मोबाइल जब्ती और कार्रवाई
शिकायत प्राप्त होते ही कॉलेज प्रशासन ने बिना किसी विलंब के अपनी एंटी-रैगिंग समिति की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में शिकायत में नामजद किए गए सभी सीनियर विद्यार्थियों को तलब किया गया, जहाँ समिति के सदस्यों ने उनका पक्ष सुना और गहन पड़ताल के तहत उनके मोबाइल फोन की भी बारीकी से जांच की। तकनीकी और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर समिति ने पाया कि जूनियर छात्रों द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से सत्य हैं और आरोपित सीनियर छात्रों का यह कृत्य संस्थान की गरिमा के विरुद्ध गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसके पश्चात समिति ने अपनी विस्तृत संस्तुति रिपोर्ट कॉलेज प्राचार्य को सौंप दी, जिसके आधार पर यह कड़ा दंडात्मक निर्णय लिया गया।
निलंबन की अवधि और कॉलेज प्रशासन की दो टूक चेतावनी
एंटी-रैगिंग समिति की पुख्ता सिफारिश के बाद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस जोधा ने आधिकारिक रूप से निलंबन आदेश जारी कर दिए। इसके अंतर्गत 14 विद्यार्थियों को एक माह के लिए शिक्षण कार्यक्रमों, अकादमिक गतिविधियों तथा क्लिनिकल पोस्टिंग से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। इस सजा के दौरान ये छात्र छात्रावास, पुस्तकालय (लाइब्रेरी) और वाचनालय जैसी किसी भी सुविधा का उपयोग नहीं कर सकेंगे। वहीं, मामले में अधिक संलिप्तता पाए जाने के कारण पांच अन्य विद्यार्थियों पर तीन महीने का कड़ा निलंबन लगाया गया है। प्राचार्य डॉ. बीएस जोधा ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि मेडिकल कॉलेज परिसर में छात्र-छात्राओं के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाली रैगिंग जैसी अवांछनीय गतिविधियों को भविष्य में भी कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


