नई दिल्ली। देश भर में लगातार बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाने के उद्देश्य से प्रस्तावित कड़े बीएस-7 (BS-7) उत्सर्जन मानकों के क्रियान्वयन को लेकर वाहन निर्माण उद्योग से जुड़ी कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस संदर्भ में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से सकारात्मक संकेत प्रदान किए गए हैं। हालांकि, ऑटोमोबाइल निर्माताओं को इस नई नीति के तहत कितनी रियायत मिल सकेगी और इससे उन्हें कितना वित्तीय लाभ पहुंचेगा, इस बारे में आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
ऑटोमोबाइल निर्माताओं के संगठन सियाम के सुझाव और आपत्तियां
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित नए उत्सर्जन नियमों के प्रारूप पर देश भर के संबंधित हितधारकों, विशेषज्ञों और वाहन निर्माताओं से सुझाव तथा आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इस प्रक्रिया के तहत वाहन निर्माताओं के प्रमुख संगठन 'सियाम' (SIAM) ने मंत्रालय को एक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में भारी वाणिज्यिक वाहनों जैसे कि बसों और ट्रकों के टायरों तथा ब्रेक प्रणालियों से उत्सर्जित होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले नए प्रावधानों को अप्रैल 2031 के स्थान पर बढ़ाकर अप्रैल 2035 से लागू किए जाने का आधिकारिक सुझाव दिया गया है।
हल्के मालवाहक वाहनों और यात्री कारों के लिए प्रस्तावित समयसीमा
मंत्रालय के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार पर्यावरणीय शुद्धता और स्वच्छ भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए बीएस-7 मानकों को हर हाल में लागू करने के प्रति कटिबद्ध है, परंतु वाहन निर्माताओं की व्यावहारिक चिंताओं पर विचार करने हेतु बातचीत के द्वार पूरी तरह खुले रखे गए हैं। तय प्रस्ताव के मुताबिक आगामी 1 अप्रैल 2029 से देश में निर्मित होने वाली सभी नई यात्री कारों के मॉडलों पर बीएस-7 उत्सर्जन मानक अनिवार्य रूप से लागू किए जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, आगामी 1 अप्रैल 2030 से एन-1 श्रेणी के अंतर्गत आने वाले हल्के मालवाहक वाहनों (कमर्शियल व्हीकल्स) के लिए भी इन सख्त नियमों को प्रभावी कर दिया जाएगा।


