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    शाम होते ही घर के इन 2 कोनों में जरूर करें रोशनी, वरना जीवन पर पड़ सकता है राहु-दोष और नकारात्मक ऊर्जा का बुरा असर

    सूर्यास्त के बाद का समय सिर्फ दिन और रात के बीच का बदलाव नहीं माना जाता, बल्कि ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसे बेहद संवेदनशील समय बताया गया है. पुराने समय में दादी-नानी अक्सर कहती थीं कि “शाम ढलते ही घर में अंधेरा नहीं होना चाहिए”, लेकिन इसके पीछे सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि गहरा ज्योतिषीय महत्व भी जुड़ा है. मान्यता है कि संध्याकाल में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाएं सबसे ज्यादा सक्रिय रहती हैं. ऐसे में अगर घर के कुछ हिस्से अंधेरे में डूबे रहें, तो राहु, केतु और अलक्ष्मी जैसी नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है.
    यही वजह है कि वास्तु और ज्योतिष दोनों में शाम के समय दीपक जलाने और घर को रोशन रखने की सलाह दी जाती है. खासतौर पर घर के दो हिस्सों में कभी अंधेरा नहीं रहने देना चाहिए, वरना सुख-शांति और धन पर असर पड़ सकता है.
    संध्याकाल को क्यों माना जाता है खास?
    ज्योतिष शास्त्र में संध्या का समय देवताओं और ग्रहों की ऊर्जा से जुड़ा माना गया है. यह वह समय होता है जब सूर्य अपनी अंतिम किरणें छोड़ता है और चंद्रमा की ऊर्जा सक्रिय होने लगती है. मान्यता है कि इसी समय माता लक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण करती हैं और जिन घरों में साफ-सफाई व प्रकाश होता है, वहां उनका प्रवेश होता है. पुराने घरों में आपने देखा होगा कि शाम होते ही तुलसी के पास दीपक जलाया जाता था. यह सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन का एक तरीका माना जाता है. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, शाम के समय घर में अंधेरा रहने से मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं.

    मुख्य द्वार पर अंधेरा बढ़ा सकता है राहु का प्रभाव
    1. घर का प्रवेश द्वार होता है ऊर्जा का रास्ता
    वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर का मुख्य द्वार सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार भी होता है, अगर शाम के समय यहां अंधेरा रहता है, तो राहु और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ने लगता है. कई लोग दिनभर की भागदौड़ में बाहर की लाइट जलाना भूल जाते हैं. धीरे-धीरे घर में बिना वजह तनाव, पैसों की तंगी या परिवार में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ने लगते हैं. ज्योतिष में इसे ऊर्जा असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है.
    क्या करें उपाय?
    सूर्यास्त के तुरंत बाद मुख्य द्वार पर हल्की लेकिन साफ रोशनी जरूर रखें, अगर संभव हो तो सरसों के तेल का दीपक जलाएं. मान्यता है कि इससे राहु-दोष शांत होता है और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है. साथ ही मुख्य दरवाजे के आसपास गंदगी बिल्कुल न रहने दें.

    2. ईशान कोण में अंधेरा बन सकता है वास्तु दोष की वजह
    देवताओं का स्थान माना जाता है यह कोना घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे पवित्र दिशा माना गया है. ज्यादातर घरों में मंदिर या पूजा स्थान इसी दिशा में बनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिशा पर गुरु ग्रह और देव ऊर्जा का प्रभाव रहता है, अगर शाम के समय पूजा घर या ईशान कोण अंधेरे में रहता है, तो घर में मानसिक तनाव, निर्णय लेने में भ्रम और आर्थिक रुकावटें बढ़ सकती हैं. कई बार लोग महसूस करते हैं कि बिना वजह घर का माहौल भारी-भारी सा लगने लगा है. वास्तु में इसे नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है.

    3. दीपक जलाने से मिलता है सकारात्मक प्रभाव
    शाम के समय पूजा घर में घी का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है, अगर रोज दीपक जलाना संभव न हो, तो कम से कम एक छोटी रोशनी जरूर रखें. मान्यता है कि इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और घर में शांति बनी रहती है.
    4. रसोई में अंधेरा क्यों नहीं होना चाहिए?
    वास्तु में रसोई को माता अन्नपूर्णा का स्थान कहा गया है. शाम के समय अगर किचन पूरी तरह अंधेरा रहता है, तो इसका असर घर की सेहत और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है. कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि रसोई में हल्की रोशनी बनाए रखने से घर में अन्न और धन की कमी नहीं होती. यही वजह है कि पुराने समय में लोग रात में भी रसोई में छोटा दीपक जलाकर रखते थे.

    बदलती लाइफस्टाइल में भूल रहे हैं पुरानी परंपराएं
    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इन छोटी-छोटी बातों को अंधविश्वास मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन भारतीय ज्योतिष और वास्तु में इन नियमों को ऊर्जा संतुलन से जोड़कर देखा गया है. कई परिवार आज भी शाम के समय घर में दीपक और रोशनी रखने की परंपरा निभाते हैं और इसे घर की सुख-समृद्धि से जोड़ते हैं.

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