More
    Homeराजनीतिपंजाब में लीडरशिप चेंज पर बोले भूपेश बघेल, अटकलों को लेकर कही...

    पंजाब में लीडरशिप चेंज पर बोले भूपेश बघेल, अटकलों को लेकर कही बड़ी बात

    नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह थमती नजर नहीं आ रही है। इस सियासी खींचतान को सुलझाने और जमीनी हकीकत का आकलन करने के बाद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी है। भूपेश बघेल और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दिल्ली में कांग्रेस संगठन महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और राज्य के ताजा घटनाक्रम से अवगत कराया।

    नेतृत्व बदलने के सवाल पर भड़के भूपेश बघेल

    केसी वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद जब मीडिया ने भूपेश बघेल से पंजाब में लीडरशिप (प्रदेश अध्यक्ष) बदलने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने तीखा रुख अपनाया। बघेल ने कहा, "मैंने पंजाब का छह दिवसीय दौरा किया है, जहाँ मैंने सभी गुटों के नेताओं से मुलाकात की। पंजाब कांग्रेस कमेटी की सामूहिक बैठक के साथ-साथ नेताओं से वन-टू-वन (अकेले में) चर्चा भी हुई है। मैंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट केसी वेणुगोपाल को सौंप दी है।" जब पत्रकारों ने रिपोर्ट के नतीजों पर सवाल किया तो उन्होंने दोटूक लहजे में कहा, "मैं आपको रिपोर्ट की बातें क्यों बताऊं? यह कोई बच्चों का खेल नहीं है।"

    चन्नी बनाम वड़िंग: क्या है विवाद की मुख्य वजह?

    पंजाब कांग्रेस में जारी इस घमासान के केंद्र में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग हैं।

    • चन्नी गुट की मांग: चरणजीत सिंह चन्नी आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस की कमान अपने हाथों में लेना चाहते हैं। उनका गुट लगातार राजा वड़िंग को हटाने के लिए हाईकमान पर दबाव बना रहा है।

    • हाईकमान का फैसला: कांग्रेस आलाकमान ने पिछले दिनों सांगठनिक नियुक्तियों की एक सूची जारी कर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा, जबकि चन्नी को केवल चुनाव प्रचार समिति (कैंपेन कमेटी) का अध्यक्ष बनाकर संतुष्ट करने की कोशिश की। इसके बावजूद दोनों गुटों में तकरार कम नहीं हो रही है।

    2022 की गलती से सबक, राजा वड़िंग पर भरोसा

    सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान इस बार चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व बदलकर कोई बड़ा जोखिम (रिस्क) लेने के मूड में नहीं है। पार्टी को साल 2022 के विधानसभा चुनाव का कड़वा अनुभव है, जब ऐन वक्त पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। पार्टी का वह दांव उलटा पड़ा था और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

    इसके अलावा, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने न जाने के पीछे उनका हालिया प्रदर्शन भी है। साल 2022 की हार के बाद वड़िंग ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए कड़ी मेहनत की। इसी का नतीजा था कि राज्य की 13 लोकसभा सीटों में से 7 सीटों पर कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की, जिसके कारण फिलहाल आलाकमान का पूरा समर्थन राजा वड़िंग के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here