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    बिज अपडेट्स: CDS जनरल अनिल चौहान के ब्रिटेन दौरे से रक्षा साझेदारी मजबूत

    भारत-यूके रक्षा संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत: जनरल अनिल चौहान का ब्रिटेन दौरा

    लंदन: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान की हालिया ब्रिटेन यात्रा ने दोनों देशों के बीच सामरिक और रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। इस दौरे का मुख्य केंद्र रक्षा विनिर्माण (Manufacturing) और तकनीक साझा करने के भविष्य के रोडमैप को तैयार करना रहा।

    रक्षा औद्योगिक साझेदारी और 'सह-उत्पादन' पर जोर

    ब्रिटेन के रक्षा उद्योग के दिग्गज प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जनरल चौहान ने भारत के बढ़ते रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय केवल 'खरीद-बिक्री' का नहीं, बल्कि 'सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन' का है।

    • तकनीक हस्तांतरण: जनरल ने महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के हस्तांतरण (ToT) की आवश्यकता पर बल दिया।
    • सप्लाई चेन: दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को और अधिक लचीला और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
    • आर्थिक एकीकरण: उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत और यूके के बीच आर्थिक रिश्ते गहरे होंगे, रक्षा सहयोग में आने वाली बाधाएं स्वतः दूर हो जाएंगी।

    शहीदों को नमन: साझा सैन्य विरासत का सम्मान

    अपनी यात्रा के दौरान जनरल चौहान ने लंदन स्थित 'मेमोरियल गेट्स' (स्मारक द्वार) पर जाकर विश्व युद्धों में अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारतीय और राष्ट्रमंडल सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
    एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS) के अनुसार, यह समारोह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सेवा, साहस और बलिदान के उन साझा मूल्यों का प्रतीक है, जो हमारे रक्षा संबंधों की नींव हैं।

    रणनीतिक संवाद और गोलमेज सम्मेलन

    • जनरल चौहान ने ब्रिटेन की इंडो-पैसिफिक मामलों की राज्य मंत्री सीमा मल्होत्रा से भी मुलाकात की, जहाँ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और आपसी हितों पर संवाद हुआ।
    • यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा "भारतीय सैन्य परिवर्तन: चुनौतियां और अवसर" विषय पर आयोजित गोलमेज सम्मेलन रहा। इसकी अध्यक्षता करते हुए जनरल चौहान ने:
    • भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और 'थिएटरइजेशन' प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
    • वैश्विक थिंक-टैंक और रणनीतिक विशेषज्ञों के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
    • उभरती प्रौद्योगिकियों (AI, साइबर सुरक्षा) में सहयोग की संभावनाओं को तलाशा।

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