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    क्या फिर से जवान हो सकता है दिमाग? रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

    लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी ने लोगों की सेहत को किस कदर नुकसान पहुंचाया है, ये हमारी सोच से कहीं आगे है। इससे न सिर्फ हम कम उम्र में ही मोटापा, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार होते जा रहे हैं, बल्कि ये हमें समय से पहले बुढ़ापे की ओर भी धकेलता जा रहा है।हमारी गड़बड़ आदतें किस तरह से मस्तिष्क को समय से पहले बूढ़ा बनाती जा रही हैं। लिहाजा कम उम्र में ही छोटी-छोटी बातें भूलने, ध्यान भटकने, बिना वजह चिड़चिड़ापन और हर वक्त तनाव बने रहने जैसी दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या हम सच में अपने दिमाग को वो दे पा रहे हैं जिसकी उसे जरूरत है? या फिर हम खुद ही उसे समय से पहले बूढ़ा बना रहे हैं?

    इन सवालों का जवाब ढूंढ रही विशेषज्ञों की टीम ने एक हालिया रिपोर्ट में थोड़ी राहत भरी जानकारी साझा की है।  दुनिया के जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट ने कुछ ऐसे तरीकों की जानकारी दी है जिसकी मदद से सिर्फ तीन महीने के भीतर ही आप अपने दिमाग की बायोलॉजिकल उम्र को कम कर सकते हैं।

    ब्रेन हेल्थ होगा ठीक, दूर होगा अल्जाइमर

    वर्षों से वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का मानना था कि हम एक निश्चित संख्या में मस्तिष्क कोशिकाओं (ब्रेन सेल्स) के साथ पैदा होते है, हमें इन्हीं के साथ जीवन बिताना होता है।
     
    हमारा दिमाग नई कोशिकाएं नहीं बना सकता। शायद यही कारण है कि अल्जाइमर जैसे रोगों को निश्चित रूप से रोका भी नहीं जा सकता।
    इसलिए, यह मान लिया गया था कि जब मस्तिष्क बूढ़ा हो जाता है, तो इसे दोबारा ठीक नहीं किया जा सकता है। 

    हालांकि हाल ही में हुई शोध ने इन भ्रांतियों को पूरी तरह से तोड़ दिया है। विशेषज्ञों ने कहा, चोट या बीमारी से आपके दिमाग को अगर नुकसान पहुंचता है, ऐसी स्थिति में भी कुछ उपाय किए जाएं तो आपका दिमाग दोबारा नए सेल्स बना सकता है, खुद को फिर से व्यवस्थित भी कर सकता है। इसने डिमेंशिया जैसे रोग के शिकार लोगों के लिए बड़ी उम्मीद जगा दी है।  

    डिमेंशिया जैसे खतरनाक रोगों से भी हो सकता है बचाव

    'द लैंसेट' जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने 14 ऐसे कारकों की पहचान की  है जिन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बदला जा सकता है। ये डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के लगभग आधे मामलों (45 प्रतिशत) को रोकने में भी मदद कर सकती है। 

    • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपके शरीर में ApoE4 जीन भी मौजूद है, तो भी आप दिमाग की बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं 
    • ApoE4 जीन को  अल्जाइमर रोग को बढ़ाने के लिए अध्ययनों में जिम्मेदार पाया गया है। 
    • विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करने से इस बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

    अध्ययन में क्या पता चला?

    सेंट लुइस यूनिवर्सिटी में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने ये अध्ययन किया। इसमें उन लोगों को शामिल किया गया जो शारीरिक तौर पर कम सक्रिय रहते थे। इनमें अल्जामइमर से जुड़े असामान्य एमाइलॉइड प्रोटीन के स्तर की जांच की गई।

    • इसके परिणामों की तुलना उन लोगों से की गई जो बहुत नियमित व्यायाम करते थे और शारीरिक तौर पर खूब सक्रिय भी।
    • इन दोनों ही समूहों में ऐसे लोग शामिल थे जिनके शरीर में ApoE4 जीन का प्रकार मौजूद था और ऐसे भी जिनके शरीर में यह जीन नहीं था।

    शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग खूब सक्रिय थे और नियमित व्यायाम करते थे उनके शरीर में ApoE4 जीन मौजूद होने के बावजूद एमाइलॉइड प्रोटीन का स्तर कम था। इस प्रोटीन का स्तर उतना ही पाया गया जितना कि उन लोगों में था जिनके शरीर में ApoE4 जीन मौजूद ही नहीं था। ये प्रोटीन मस्तिष्क में जमा होकर अल्जाइमर और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का कारण बन सकता है।

    ब्रेन को जवान बनाए रखने का जानिए तरीका

    अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के माइंड-ब्रेन इंस्टीट्यूट में  जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट और प्रोफेसर डॉ मजीद फोतुही कहते हैं, इसमें पाया गया है कि सिर्फ व्यायाम की मदद से ही आप अपने ब्रेन से संबंधित जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। कम से कम दिमाग में एमाइलॉइड जमा होने के मामले में ये बहुत कारगर है| 

    • जीवनशैली में बदलाव करके आप बुढ़ापे तक अपने दिमाग को स्वस्थ रख सकते हैं, चाहे आपकी फैमिली हिस्ट्री कैसी भी रही हो।
    • मरीजों के साथ मेरे दशकों का अनुभव पांच मुख्य चीजों पर टिका है- व्यायाम, अच्छी नींद, सही खान-पान, शांत मन और दिमाग को तेज करने वाली तकनीकें। इसे ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों ने भी कारगर माना है। 

    साल 2016 में किए गए एक अध्ययन में 127 मरीजों को शामिल किया गया था। इनमें से 84 प्रतिशत मरीजों ने सिर्फ 12 हफ़्तों में ही अपनी दिमागी सेहत में जबरदस्त सुधार देखा। एमआरआई स्कैन से पता चला कि आधे से ज्यादा मरीजों के दिमाग का हिप्पोकैम्पस हिस्सा (जो याददाश्त से जुड़ा होता है) इसका आकार 3 प्रतिशत तक बढ़ गया था।सिर्फ 12 हफ़्तों में ही उनके दिमाग लगभग तीन साल ज्यादा जवान हो गए थे। ये पांच तरीके सभी लोगों के लिए कारगर साबित हो सकते हैं।

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