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    CCTV में कैद हुई रीवा बाल गृह से 6 नाबालिगों की भागने की घटना

    रीवा: रीवा के समान थाना क्षेत्र में स्थित बाल संप्रेक्षण गृह (सुधार गृह) से मंगलवार सुबह एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को अलर्ट मोड पर ला दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यहां रहने वाले छह नाबालिग बाथरूम की खिड़की तोड़कर परिसर से बाहर भाग निकले। सुबह जब बच्चों की गिनती की गई, तब इस फरारी का खुलासा हुआ। इसके बाद तुरंत पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई।

    बाथरूम की खिड़की तोड़कर भागे नाबालिग

    पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सभी छह नाबालिग सुबह करीब 7 से 8 बजे के बीच फरार हुए हैं। घटना के बाद जब संप्रेक्षण गृह के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले गए, तो उसमें बच्चे परिसर से बाहर निकलते हुए साफ दिखाई दिए। फुटेज से यह भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि भागने की यह योजना पहले से ही तैयार की गई थी। परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों को इस घटना की खबर काफी देर बाद लगी, जिसका फायदा उठाकर बच्चों को भागने का पूरा समय मिल गया।

    सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

    इस घटना ने बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। गंभीर अपराधों में शामिल नाबालिगों को जिस सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है, वहां से एक साथ छह बच्चों का गायब होना प्रबंधन पर कई सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बच्चे बाथरूम की खिड़की तोड़ रहे थे, तब किसी भी सुरक्षाकर्मी की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे केंद्रों में सिर्फ ऊंची दीवारें और ताले ही काफी नहीं होते, बल्कि लगातार निगरानी भी जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, इस केंद्र से पहले भी नाबालिगों के भागने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    पुलिस का सर्च ऑपरेशन और जांच तेज

    घटना की गंभीरता को देखते हुए रीवा पुलिस ने शहरभर में एक व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। शहर के मुख्य रास्तों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी कड़ी कर दी गई है ताकि बच्चे शहर से बाहर न भाग सकें। पुलिस की अलग-अलग टीमें उनके संभावित ठिकानों और परिचितों के यहां दबिश दे रही हैं। पुलिस इस बात की भी बारीकी से जांच कर रही है कि कहीं इन बच्चों को भागने में बाहर से किसी व्यक्ति की मदद तो नहीं मिली थी।

    यह घटना केवल बच्चों के भागने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाल सुधार गृहों की सुरक्षा और अंदरूनी व्यवस्था को सुधारने के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।

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