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    बिलासपुर के कोनी में बर्ड फ्लू का खतरा, केंद्र ने जारी किया अलर्ट

    बिलासपुर|बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में बर्ड फ्लू को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 5 अप्रैल को केंद्रीय टीम जांच के लिए पहुंचेगी. इस टीम में एनसीडीसी और एम्स के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे, जो पूरे मामले का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन करेंगे|

    17 लोगाें के लिए गए सैंपल

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक 17 लोगों के सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से पहले 24 सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई है. हालांकि, एहतियात के तौर पर प्रशासन ने 1 किलोमीटर के दायरे को संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया है और यहां चिकन तथा अंडों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है|

    इस बीच, बिलासपुर में अंडों की सप्लाई जारी है. प्रतिबंध के बावजूद अन्य क्षेत्रों से अंडों को लाया और ले जाया जा रहा है, जिसकी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं प्रशासन का पूरा फोकस फिलहाल इस समय संक्रमण को फैलने से रोकना है और आम लोगों के बीच किसी प्रकार की दहशत को नियंत्रित करना है|

    बर्ड फ्लू के खतरे के बीच प्रशासनिक अलर्ट

    कोनी क्षेत्र में पक्षियों की अचानक मौत के बाद बर्ड फ्लू की आंशका सामने आई थी. इसको लेकर स्‍थानीय प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया. प्रभावित क्षेत्र को सील नहीं किया गया, लेकिन आवाजाही पर निगरानी को बढ़ा दिया गया. इस मामले में पशुपालन विभाग की टीम लगातार सर्वे कर रही है. मृत पक्षियों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं|

    लोगाें के लिए जारी हुई एडवाइजरी

    प्रशासन ने लोगों को सतर्क किया है और सावधान रहने की अपील की है. प्रशासन ने मृत या बीमार पक्षि‍यों से दूर रहने की सलाह दी है. किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत सूचना देने की सलाह दी जा रही है. साथ ही पोल्‍ट्री उत्पादों के सेवन से फि‍लहाल बचने को कहा गया है|

    क्या है बर्ड फ्लू?

    बर्ड फ्लू एक ऐसी वायरल संक्रमण बीमारी है, जो आमतौर पर पक्षियों में फैलती है. कुछ मामलों में यह इंसानों तक भी पहुंच सकती है. यदि बर्ड फ्लू को सही समय पर कंट्रोल नहीं किया जाए तो यह तेजी से फैल सकता है. इसके लिए शुरुआती तोर पर ही रोकथाम बेहद जरुरी होती है|

    फास्टैग में दर्ज विवरण से बन रहीं पर्चियां

    एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों का टोल फास्टैग से काटा जाता है। ऐसे में फास्टैग में जो विवरण दर्ज होगा, उसकी ही पर्ची प्रिंट होती है। मामले में एनएचएआई की ओर से किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है। जांच का मामला परिवहन विभाग का है। यह समझना होगा।

    फर्जी नंबरों से काट रहे टोल

    आरटीओ (प्रवर्तन) प्रभात पांडेय ने बताया कि  लखनऊ के टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों की जांच में यह बात सामने आई है कि टोल पर फर्जी नंबरों से पर्चियां काटी जा रही हैं। ऐसे नंबर, जिनका कहीं कोई अस्तित्व नहीं है। ऐसे में हादसा होने की स्थिति में जिम्मेदारों पर कार्रवाई तक नहीं की जा सकती।

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