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    चांदीपुरा वायरस से गुजरात में हड़कंप, तीन मासूमों की मौत, स्वास्थ्य विभाग सतर्क

    गांधीनगर। गुजरात के उत्तर और मध्यवर्ती इलाकों में एक बेहद दुर्लभ और घातक वायरस के पैर पसारने से चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। इस संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए राज्य का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से हाई-अलर्ट पर आ गया है और प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन कदम उठाए जा रहे हैं।

    चांदीपुरा वायरस के संक्रमण से अब तक तीन मासूमों ने गंवाई जान

    राज्य में इस जानलेवा बीमारी ने बच्चों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है, जिससे स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वायरस के गंभीर संक्रमण की वजह से अब तक तीन बच्चों की असामयिक मौत हो चुकी है। चिकित्सा जांच में इन सभी बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी। इस दुःखद घटना के बाद से ही प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीण और शहरी अंचलों में बीमारी की रोकथाम के लिए कड़े सुरक्षात्मक उपाय और दवाइयों का छिड़काव युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।

    प्रभावित क्षेत्रों का विवरण और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति

    संक्रमण के भौगोलिक प्रसार पर नजर डालें तो जान गंवाने वाले बच्चों में से दो का संबंध वडोदरा और गोधरा के स्थानीय इलाकों से था। वहीं, तीसरा बच्चा पड़ोसी राज्य राजस्थान का रहने वाला था, जिसे अत्यंत गंभीर स्थिति में इलाज के लिए हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल में रेफर किया गया था, जहाँ उसने दम तोड़ दिया। वर्तमान में, विसनगर क्षेत्र का एक और बच्चा इस खतरनाक वायरस से ग्रसित मिला है, जिसे तुरंत वडनगर के विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की विशेष टीम उसकी स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रही है।

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा संदिग्ध लक्षणों वाले बच्चों की सघन स्क्रीनिंग

    इस फैलते संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में तेज बुखार, उल्टी और अचेत होने जैसे लक्षणों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संदिग्ध लक्षण दिखने पर मरीजों को तुरंत आइसोलेट कर उनके रक्त के नमूने जांच के लिए राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं। सरकार ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि शुरुआती स्तर पर ही बीमारी की पहचान की जा सके।

    ग्रामीण इलाकों में जन-जागरूकता और बचाव कार्य तेज

    यह वायरस मुख्य रूप से कटीली झाड़ियों और कच्चे मकानों में पाए जाने वाले कीड़ों (सैंडफ्लाई) के जरिए फैलता है, जिसे देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान तेज कर दिया गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं और रात में मच्छरों व कीड़ों से बचाव के लिए जाली का उपयोग करें। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी तरह के तेज बुखार को सामान्य न समझें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें।

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