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    HomeराजनीतिAIADMK में सियासी हलचल, विधायकों के इस्तीफे पर कानूनी पेंच

    AIADMK में सियासी हलचल, विधायकों के इस्तीफे पर कानूनी पेंच

    चेन्नई: तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों से एक बड़ा कानूनी और सियासी विवाद सामने आया है, जहां ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के तीन विधायकों के इस्तीफे को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता एम.एल. रवि ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार द्वारा इन विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने संबंधी राजपत्र (गजट) अधिसूचना को पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।

    दल-बदल विरोधी कानून के उल्लंघन का आरोप

    याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि एआईएडीएमके के विधायक मरगथम कुमारवेल, एस. जयकुमार और पी. सत्यभामा के इस्तीफे जल्दबाजी में स्वीकार करने का फैसला संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग हमेशा संविधान के पवित्र उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहिए, न कि ऐसी कोई स्थिति पैदा करने के लिए जिससे संवैधानिक सुरक्षा उपाय और लोकतांत्रिक नियम पूरी तरह बेअसर हो जाएं।

    सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का दिया हवाला

    याचिकाकर्ता एम.एल. रवि ने अदालत से यह भी गुहार लगाई है कि तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष को उनके पास पहले से लंबित अयोग्यता (डिस्क्वालिफिकेशन) याचिकाओं का कानून और सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार जल्द से जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में देश की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक 'किहोटो होल्लोहन' मामले का हवाला देते हुए याद दिलाया गया है कि संविधान की दसवीं अनुसूची संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण व्यवस्था है। ऐसे में अयोग्यता याचिकाओं पर कोई अंतिम निर्णय लिए बिना विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लेना कानून को सीधे तौर पर दरकिनार करने जैसा है।

    शुक्रवार को होगी मामले की अहम सुनवाई

    याचिका में इस पूरी प्रक्रिया को संवैधानिक शक्तियों का दुरुपयोग और मनमाना रवैया करार दिया गया है। राज्य की राजनीति में भूचाल लाने वाले इस बेहद संवेदनशील कानूनी मामले पर मद्रास हाईकोर्ट में इसी शुक्रवार को सुनवाई होने की प्रबल संभावना है। इस सुनवाई पर राज्य के दोनों प्रमुख सियासी दलों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर राज्य की आगे की राजनीति पर पड़ सकता है।

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