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    संसद परिसर में कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल; अमित शाह पर निशाना

    नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिसिया कार्रवाई और बर्बरता के विरोध में कांग्रेस पार्टी के सांसदों ने सोमवार को संसद परिसर में जोरदार हंगामा और प्रदर्शन किया। पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार के सामने इकट्ठा होकर कड़ा विरोध जताया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    तख्तियों और बैनरों के साथ सांसदों का अनोखा विरोध

    संसद परिसर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद अपने हाथों में विभिन्न नारे लिखी हुई तख्तियां और बड़े बैनर लेकर शामिल हुए।

    • इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि देश का भविष्य कहे जाने वाले छात्र जब शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, तब पुलिस ने उनके साथ अमानवीय और बर्बर व्यवहार किया।

    • विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री से इस गंभीर मामले पर संसद के पटल पर जवाब देने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

    राहुल गांधी का गृह मंत्री को कड़ा पत्र

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर इस मामले में सीधी जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    • पत्र के मुख्य बिंदु: राहुल गांधी ने अपने पत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुए कथित बर्बर हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए पूछा है कि क्या देश के प्रदर्शनकारी युवाओं पर पैलेट गन जैसे घातक हथियारों के इस्तेमाल की आधिकारिक अनुमति गृह मंत्री द्वारा दी गई थी?

    • लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात: राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना किसी भी जीवंत लोकतंत्र का एक मौलिक और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। सरकार की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा उनकी समस्याओं का समाधान बल प्रयोग के बजाय संवाद के माध्यम से निकाले। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई इस कथित हिंसा ने लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरी ठेस पहुंचाई है, जिससे पूरे देश के युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। देश के युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, और सरकार को हर हाल में इन जायज सवालों का जवाब देना होगा।

    कांग्रेस सांसदों ने सरकार को घेरा

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के अन्य प्रमुख नेताओं ने भी सरकार पर तीखे हमले किए:

    • केसी वेणुगोपाल ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, "गृह मंत्री इस समय कहां हैं और वे कहां छिपे हुए हैं? उन्हें लोकसभा के भीतर आकर इस बात का स्पष्ट जवाब देना होगा कि आखिर बिहार में एके-47 (AK-47) और दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था? देश की जनता को ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इन सभी अत्याचारों के पीछे सीधे तौर पर उन्हीं का आदेश था।"

    • वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "क्या निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल करना किसी भी प्रकार से न्यायसंगत है? इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है कि यह पूरी तरह से गलत है।" उन्होंने कानून-व्यवस्था की प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि सामान्यतः किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान धारा 144 लागू होने पर पहले लाठीचार्ज या वॉटर कैनन का उपयोग होता है, लेकिन निहत्थे छात्रों पर सीधे इस तरह के घातक हथियारों का प्रयोग अत्यंत अमानवीय है।

    कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर मजबूती से उठाते रहेंगे।

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