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    Homeदुनियाघटता भूजल और बढ़ता समुद्र, शहरों के सामने खड़ा हुआ दोहरा खतरा

    घटता भूजल और बढ़ता समुद्र, शहरों के सामने खड़ा हुआ दोहरा खतरा

    वेलिंगटन। दुनियाभर के शहरों में पीने के पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे न केवल भविष्य में जल संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है, बल्कि इसके कारण जमीन के धंसने (Land Subsidence) जैसी गंभीर भौगोलिक समस्याएं भी पैदा होने लगी हैं।

    भूजल दोहन और तेजी से घटता जल स्तर

    बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण दुनिया भर के महानगरों और नगर-निगमों पर पानी की आपूर्ति का भारी दबाव है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर भूमिगत जल स्रोतों का दोहन किया जा रहा है। शोध और रिपोर्ट्स के अनुसार, प्राकृतिक रूप से वर्षा के पानी द्वारा भूजल स्तर के पुनः भराव (Recharge) की तुलना में पानी का दोहन कई गुना अधिक तेजी से हो रहा है, जिससे aquifers (जलभृत) तेजी से खाली हो रहे हैं।

    जमीन धंसने का गंभीर खतरा (Land Subsidence)

    भूजल का अत्यधिक स्तर पर दोहन किए जाने से केवल जल संकट ही उत्पन्न नहीं हो रहा, बल्कि इसका पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर भी विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। जब भूमि के भीतर से लगातार पानी निकाला जाता है, तो मिट्टी और चट्टानों के बीच की खाली जगह बैठ जाती है, जिसके कारण जमीन धंसने लगती है। दुनिया के कई प्रमुख तटीय और inland शहरों में इस वजह से जमीन नीचे बैठने की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं, जिससे बड़ी इमारतों, सड़कों और जल निकासी तंत्र को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

    सतत प्रबंधन और वैकल्पिक उपायों की जरूरत

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारों और स्थानीय प्रशासन को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को बढ़ावा देने, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को अनिवार्य करने तथा भूजल निकासी के लिए कड़े नियम बनाने की सख्त जरूरत है, ताकि आने वाले समय में पर्यावरणीय आपदाओं से बचा जा सके।

     

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