गांधीनगर। गुजरात राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (GSCSCL) ने राज्य के 250 गोदामों से लगभग 17 हजार उचित मूल्य की दुकानों (पंडित दीनदयाल ग्राहक भंडार) तक राशन और खाद्यान्न के वितरण को सुगम, पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक लागू की है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमण सोलंकी के मार्गदर्शन में सप्लाई चेन के संपूर्ण प्रबंधन को डिजिटल स्वरूप दिया गया है।
आईसीटी लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर और रियल-टाइम ट्रैकिंग
निगम द्वारा विकसित 'आईसीटी लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर' के माध्यम से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के डिपो से लेकर राज्य के गोदामों और उचित मूल्य की दुकानों तक वाहनों की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है:
जीपीएस और रूट ऑप्टिमाइजेशन: राशन ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम और मशीन लर्निंग आधारित रूट ऑप्टिमाइजेशन तकनीक लगाई गई है।
ऑटो अलर्ट सिस्टम: तय मार्ग से वाहन के भटकने या जीपीएस बंद होने की स्थिति में सिस्टम में तुरंत अलर्ट जनरेट हो जाता है।
जियो-फेंसिंग और ईपीओडी: खाद्यान्न की सटीक डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए गोदामों और दुकानों पर जियो-फेंसिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक प्रूफ ऑफ डिलीवरी (e-POD) प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और पोर्टल एकीकरण
मुख्यालय स्तर पर स्थापित 'कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर' से सभी गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है:
पोर्टल इंटीग्रेशन: पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) पोर्टल के जरिए स्टॉक की लाइव जानकारी, दैनिक, साप्ताहिक और मासिक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अन्न दर्पण से जुड़ाव: इस पूरे सिस्टम को आईसीटी प्रोजेक्ट और एफसीआई के 'अन्न दर्पण' पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है।
सीसीटीवी कैमरों और वीडियो वॉल से सुरक्षा
गोदामों में चोरी, मिलावट और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय किए गए हैं:
अत्याधुनिक कैमरे: राज्यभर के गोदामों में बुलेट, डोम, पीटीजेड और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सहित करीब 7 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
लाइव मॉनिटरिंग: गोदाम स्तर, उप जिला प्रबंधक, जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय और केंद्रीय मुख्यालय के कमांड सेंटर में अत्याधुनिक 'वीडियो वॉल' के जरिए लाइव फीड की निगरानी की जाती है।
एमएसपी खरीद के लिए फार्मर प्रोक्योरमेंट पोर्टल (FPP)
किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खाद्यान्न की पारदर्शी खरीद सुनिश्चित करने के लिए 'फार्मर प्रोक्योरमेंट पोर्टल' काम कर रहा है। इसके अंतर्गत पहचान दस्तावेज, बैंक विवरण और भू-अभिलेखों के जनसांख्यिकीय व बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही पंजीकरण और फसल खरीद की प्रक्रिया पूरी की जाती है। साथ ही, प्रत्येक चरण की प्रगति की सूचना किसानों को सीधे एसएमएस के माध्यम से दी जाती है।


