मुरैना:देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के कड़े रुख के बाद चंबल नदी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन को पूरी तरह से समाप्त करने की कवायद तेज हो गई है। इसी सिलसिले में केंद्रीय अधिकार प्राधिकरण समिति (सीईसी) के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश गोयल ने देवरी घड़ियाल केंद्र विश्राम गृह में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस विशेष बैठक में मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना और श्योपुर, राजस्थान के धौलपुर तथा उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के जिलाधिकारियों सहित तीनों राज्यों के संबंधित विभागों के आला अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक में सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने, अवैध रेत उत्खनन पर पूर्ण विराम लगाने और भविष्य की संयुक्त रणनीति को लेकर बेहद बारीकी से रोडमैप तैयार किया गया।
मुरैना वन विभाग में आधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित, चौबीसों घंटे रखी जाएगी पैनी नजर
चंबल नदी की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। सीईसी अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए मुरैना वन विभाग के कार्यालय में एक अत्याधुनिक केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। इस नियंत्रण कक्ष के माध्यम से मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों के अंतर्गत आने वाले चंबल नदी के पूरे तटीय इलाकों की चौबीसों घंटे और सातों दिन (24/7) लाइव निगरानी की जाएगी। इस कड़े सुरक्षा चक्र के तैयार होने से रेत माफियाओं के नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने में मदद मिलेगी।
सड़कों से गायब हुए रेत माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली, शुरुआती कार्रवाई में मिली बड़ी सफलता
अदालती आदेश के बाद तीनों राज्यों की पुलिस और वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियान का असर अब धरातल पर साफ दिखाई देने लगा है। समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि चंबल नदी से होने वाले अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी रोक लगाने में सफलता मिली है। यही वजह है कि पहले जिन प्रमुख मार्गों और हाइवे पर दिन-रात अवैध रेत से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतारें और हुड़दंग दिखाई देता था, वे अब पूरी तरह से नदारद हो चुके हैं। प्रशासन की इस चौतरफा घेराबंदी और लगातार की जा रही जब्ती की कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
चंबल घड़ियाल सेंचुरी के संरक्षण और पर्यटन विकास को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का लक्ष्य
इस पूरी मुहिम का उद्देश्य केवल अवैध उत्खनन को रोकना ही नहीं है, बल्कि इस पूरे प्राकृतिक गलियारे को एक नया जीवन देना भी है। सीईसी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की मूल मंशा के अनुरूप पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों का खात्मा किया जा रहा है, ताकि विश्व प्रसिद्ध चंबल घड़ियाल सेंचुरी के जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह से सुरक्षित रह सके। इसके साथ ही, इस शांत और समृद्ध हो रहे चंबल क्षेत्र में पर्यावरण-पर्यटन (इको-टूरिज्म) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए भी प्रभावी योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हों और चंबल को पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद समृद्ध बनाया जा सके।


