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    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से बुधवार को मंत्रालय में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के भारत प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विकास सहयोगी संस्थाओं के बीच समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इस दिशा में सभी भागीदार मिलकर प्रभावी कदम उठाएँ। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, लेबर रूम प्रबंधन सुधारने, नियमित एएनसी चेक अप सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य कर्मियों के कौशल उन्नयन और आशा कार्यकर्ताओं की संचार क्षमता बढ़ाने जैसे नवाचार किए जा रहे हैं।

    मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि आशा संवाद पहल में यूएनएफपीए प्रमुख भागीदार है। राज्य की 66 हज़ार से अधिक आशा कार्यकर्ता को यूट्यूब चैनल के माध्यम से जोड़कर उनकी क्षमता संवर्धित की जा रही है। बैठक में आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन प्रशिक्षण के माध्यम से राज्य के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाने पर विशेष चर्चा हुई। भारत में यूएनएफपीए की प्रतिनिधि एवं भूटान कंट्री डायरेक्टर सुएंड्रिया एम. वोज्नार ने मध्यप्रदेश में संस्था के द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी और शासन के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी की बात कही। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं की संचार क्षमता को सशक्त बनाने, समुदायों में जागरूकता बढ़ाने, लेबर रूम की कार्यप्रणाली सुधारने तथा ऑनलाइन क्षमता निर्माण के अभिनव उपयोग पर संस्था द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

    यूएनएफपीए प्रतिनिधि वोज्नार ने स्टेट ऑफ द वर्ल्ड रिपोर्ट 2025 "द रियल फर्टिलिटी क्राइसिस" भी प्रस्तुत की। बैठक में यूएनएफपीए इंडिया ऑफिस के चीफ पॉलिसी एडवोकेसी एंड पार्टनरशिप्स जयदीप बिस्वास, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी स्पेशलिस्ट साहिल कपूर, स्टेट हेड, यूएनएफपीए – एमपी सुनील जैकब, अनुराग सोनवॉकर एवं सुनेहा पांडे उपस्थित रहे।

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