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    Homeराज्यमहाराष्ट्रकुंभ के फंड को डसेगा फडणवीस का ‘फन’!

    कुंभ के फंड को डसेगा फडणवीस का ‘फन’!

     मुंबई। नासिक कुंभ के फंड को लेकर भी लूट का प्लान बन गया है। इसके तहत सारे नेताओं को दरकिनार करके फडणवीस ने अपने खासमखास व करीबी भाजपा नेता व मंत्री गिरीश महाजन को सौंपी गई है। ऐसे में जाहिर सी बात है कि वहां क्या होनेवाला है। 

    कुंभ मेले पर ‘गंदी राजनीति’ …जनप्रतिनिधियों की नहीं पूछ …15 विधायकों, 3 सांसदों में भारी नाराजगी
    -सीएम के करीबी महाजन के हाथ कमान

    एक वर्ष बाद नासिक में होनेवाले कुंभ मेले के आयोजन और उसके लिए इस्तेमाल होने वाले फंड को लेकर राजनीति गरमा गई है। भाजपा एक तरफ तो शिंदे गुट और अजीत पवार गुट एक तरफ हो गए हैं। नासिक कुंभ के आयोजन और प्रयोजन की पूरी कमान सीएम फडणवीस के करीबी भाजपा नेता व मंत्री गिरीश महाजन को सौंपी गई है।
    सूत्रों के अनुसार, यही वजह है कि कुंभ मेले में फंड के मामले में महायुति में भारी नाराजगी है। इतना ही नहीं, भाजपा के स्थानीय नेता भी नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे में आगामी दिनों में भाजपा के लिए यह मुसीबत बन सकता है।

    नासिक कुंभ मेले की तैयारी से संबंधित बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी आवश्यक है। इसके बावजूद विरोधी पक्ष के तीनों सांसदों और यहां तक कि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों को भी इन बैठकों में बुलाया नहीं जा रहा। सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक खुलकर कुछ बोल नहीं पा रहे, लेकिन विपक्ष के सांसद भास्कर भगरे और राजाभाऊ वाजे ने कई बार इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि इन बैठकों और कुंभ मेले की योजना से महाविकास आघाड़ी के सांसदों और विधायकों के साथ-साथ सत्ताधारी दल के कुछ विधायकों को भी जानबूझकर दूर रखा जा रहा है। महायुति सरकार में विरोधी दल के नेताओं के साथ सौतेला व्यवहार तो हो ही रहा है, पर सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों को भी इन बैठकों के लिए कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया जा रहा।

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के दिंडोरी लोकसभा सांसद भास्कर भगरे ने संसद में यह मुद्दा उठाया था कि सिंहस्थ कुंभ मेला की बैठकों में महाविकास आघाड़ी के सांसदों को विश्वास में नहीं लिया जा रहा है। अपने क्षेत्र में कौन-कौन से काम कुंभ मेले के अंतर्गत हो रहे हैं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी भी नहीं दी जा रही, ऐसी शिकायत उन्होंने की थी। नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे ने भी इस संबंध में अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी। सत्तारूढ़ दल के कुछ विधायकों ने भी इस मुद्दे पर शिकायतें की थीं, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ।

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