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    तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव, पेट्रोल-डीजल और LPG में रोजाना 1700 करोड़ की मार

    नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत बिगाड़ दी है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां पिछले ढाई महीनों से पुराने दामों पर ही पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस बेच रही हैं, जिससे उन्हें रोजाना करीब 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है।

    तेल कंपनियों पर एक लाख करोड़ का बोझ, जल्द बढ़ सकते हैं दाम

    बीते 10 हफ्तों में पेट्रोलियम कंपनियों की कुल 'अंडर-रिकवरी' (लागत से कम कीमत पर बिक्री) एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है। युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम 50% तक बढ़ चुके हैं, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर हैं। हालांकि मार्च में एलपीजी सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन वह अब भी लागत से कम पर बिक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईंधन की कीमतों में इजाफा होना लगभग तय है, बस इसके समय और मात्रा पर फैसला होना बाकी है।

    गोदरेज समूह की कमान पिरोजशा के हाथ, 5 लाख करोड़ का लक्ष्य

    अगस्त से पिरोजशा गोदरेज 'गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप' के चेयरमैन का पदभार संभालेंगे। पद संभालने से पहले ही उन्होंने समूह की नई ब्रांड पहचान और भविष्य के रोडमैप का खुलासा कर दिया है। समूह ने लक्ष्य रखा है कि अगले पांच वर्षों में अपनी पूंजी को बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाए। इस रणनीतिक योजना के तहत, 2031 तक समूह की वर्तमान पूंजी में तीन गुना वृद्धि करने और दो गैर-सूचीबद्ध व्यवसायों को शेयर बाजार में लिस्ट करने की तैयारी है।

    ई-प्राप्ति पोर्टल: आधार से खोजें अपना पुराना पीएफ फंड

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने 'ई-प्राप्ति' नाम से एक नया आधार-आधारित पोर्टल शुरू किया है। यह पोर्टल उन लाखों कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा जिनका पैसा पुराने या निष्क्रिय खातों में फंसा हुआ है। अक्सर यूएएन (UAN) के दौर से पहले की नौकरियों का पीएफ विवरण कर्मचारियों के पास नहीं होता। अब आधार सत्यापन के जरिए वे अपने उन पुराने खातों को खोज सकेंगे जो उनकी वर्तमान आईडी से लिंक नहीं हैं, और उन्हें आसानी से मुख्य खाते में ट्रांसफर कर पाएंगे।

    आरबीआई का सख्त रुख: कर्ज न चुकाने पर प्रॉपर्टी होगी जब्त

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन डिफॉल्टर्स के खिलाफ सख्त नियमों का मसौदा तैयार किया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई कर्ज एनपीए (NPA) बन जाता है और वसूली के सभी कानूनी रास्ते विफल रहते हैं, तो बैंक और एनबीएफसी गिरवी रखी गई जमीन या मकान को सीधे जब्त कर सकेंगे। आरबीआई ने इन जब्त संपत्तियों को बेचने के लिए 7 साल की समय सीमा तय करने का सुझाव दिया है, ताकि वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और बैंकों का फंसा हुआ पैसा वापस आ सके।

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