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    जर्मनी के ऐतिहासिक ईगल्स नेस्ट में आग का कहर, हिटलर से जुड़ी धरोहर जलने का दावा

    बर्लिन। जर्मनी की बवेरियन पहाड़ियों पर स्थित एडोल्फ हिटलर का कुख्यात ऐतिहासिक ठिकाना 'ईगल्स नेस्ट' (केहलस्टीनहाउस) भीषण आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गया है। लगभग 6,000 फीट की ऊँचाई पर बनी इस ऐतिहासिक इमारत के मलबे में तब्दील होने के साथ ही नाज़ी दौर का एक बड़ा प्रतीक खत्म हो गया है। पुलिस को इस घटना के पीछे सोची-समझी साजिश और आगजनी की आशंका है, जिसके सिलसिले में मौके से एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। शुक्रवार रात करीब सवा नौ बजे स्मोक डिटेक्टर का अलार्म बजने के बाद दमकल विभाग को सूचना दी गई थी।

    12 घंटे तक धधकती रही भयानक आग

    यह इमारत समुद्र तल से 1,834 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जहाँ का रास्ता बेहद दुर्गम है। इसके चलते फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर पहुँचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आग बुझाने के लिए 200 से ज़्यादा फायरफाइटर्स, बवेरियन रेड क्रॉस और माउंटेन रेस्क्यू सर्विस की टीमों को तैनात किया गया। घने धुएं के कारण बचाव कर्मियों को स्पेशल ब्रीदिंग किट पहनकर जाना पड़ा। करीब 12 घंटे तक सुलगती रही इस आग पर शनिवार सुबह तक काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक इमारत का अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह खाक हो चुका था।

    हिटलर को 50वें जन्मदिन पर मिला था तोहफ़ा

    केहलस्टीनहाउस का निर्माण नाज़ी पार्टी ने 1937 से 1938 के बीच कराया था और अप्रैल 1939 में हिटलर के 50वें जन्मदिन पर इसे गिफ्ट के तौर पर दिया गया था। कड़ाके की ठंड में मजदूरों ने पहाड़ के भीतर 124 मीटर लंबी पीतल की लिफ्ट बनाकर इस मुश्किल प्रोजेक्ट को पूरा किया था। हालाँकि हिटलर यहाँ सिर्फ 14 बार ही गया था, लेकिन इस ठिकाने का इस्तेमाल विदेशी राजनयिकों के स्वागत के लिए किया जाता था।

    पुनर्निर्माण होना अब नामुमकिन

    द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मित्र देशों की सेना ने इसे अपना कमांड पोस्ट बनाया था और 1960 में इसे बवेरिया सरकार को सौंप दिया था। साल 1952 से यहाँ एक रेस्टोरेंट और नाज़ी दौर के इतिहास से जुड़ी प्रदर्शनी चलाई जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि इस अग्निकांड में हुए भीषण नुकसान के बाद अब इमारत को दोबारा उसके पुराने रूप में ला पाना पूरी तरह से नामुमकिन है।

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