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    पढ़ने में एवरेज थे, फिर भी एक ही परिवार से 5 बच्चे नीट में हुए सिलेक्ट

    जयपुर। नीट पेपर लीक मामले में हो रहे नए खुलासों के बीच अब राजस्थान का एक परिवार जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। इस मामले में बिवाल परिवार के तीन सदस्यों— दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दिनेश और मांगीलाल ने लीक हुआ पेपर अपने ही परिवार के बच्चों को उपलब्ध कराया था। इस परिवार के दो बच्चों ने इस साल नीट की परीक्षा दी है, जबकि पांच बच्चे पिछले साल ही परीक्षा पास कर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ बच्चे पढ़ाई में बेहद औसत थे, जिससे उनके चयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
    जांच के दायरे में आए विकास बिवाल का पिछला शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद सामान्य रहा है। विकास को 12वीं कक्षा में महज 55 फीसदी अंक मिले थे, लेकिन नीट जैसी कठिन परीक्षा में उसने 86 फीसदी अंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की कर ली। सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन के मुताबिक, विकास इस साल जनवरी से लगातार कॉलेज से गायब चल रहा था और कॉलेज की परीक्षाओं में उसका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक था, जहां उसे औसतन केवल 30 फीसदी नंबर ही मिल पा रहे थे। अपने पिता और चाचा की गिरफ्तारी के बाद वह कॉलेज से पूरी तरह गायब हो गया था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
    परिवार के अन्य बच्चों का रिकॉर्ड भी अब संदेह के घेरे में है। दिनेश और मांगीलाल के दिवंगत भाई की बेटी पलक जयपुर के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज की छात्रा है। पलक स्कूली शिक्षा में तो होनहार थी और उसने नीट में 98.61 फीसदी अंक हासिल किए थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज के टेस्ट में वह एक औसत छात्रा साबित हुई। अपने चाचा की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही वह भी बिना बताए हॉस्टल से गायब हो गई। इसी तरह मांगीलाल की बेटी प्रगति, जो दौसा के मेडिकल कॉलेज में पढ़ती है, उसने भी अपने पिता और भाई की गिरफ्तारी वाले दिन कॉलेज से छुट्टी ले ली थी। प्रगति ने कोरोना काल के दौरान 12वीं में 91 फीसदी और नीट में 89 फीसदी अंक हासिल किए थे।
    इसके अलावा, इस साल नीट परीक्षा में बैठने वाले परिवार के दो अन्य छात्र ऋषि और अमन भी पढ़ाई में बेहद कमजोर रहे हैं। इनमें से ऋषि ने 12वीं की परीक्षा ग्रेस मार्क्स के साथ केवल 50 फीसदी अंकों से पास की थी। पढ़ाई में इतने कमजोर होने के बावजूद मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठने और पिछले बच्चों के संदिग्ध प्रदर्शन को देखते हुए जांच एजेंसियां इन सभी कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं। अब इस बात की गहनता से पड़ताल की जा रही है कि क्या पिछले साल चयनित हुए इन बच्चों को भी किसी अनुचित तरीके से मदद पहुंचाई गई थी।
     

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