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    गोला-बारूद के कंपोनेंट से लेकर मिसाइल निर्माण तक, MP में बनेगा डिफेंस का मेगा सेंटर

    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। राज्य में जल्द ही दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा प्राइवेट मिसाइल इकोसिस्टम आकार लेने वाला है, जहाँ 'मिशन रेडी' मिसाइलें और गोला-बारूद के महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स (पुर्जे) तैयार किए जाएंगे। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रविवार (5 जुलाई 2026) को इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस बड़े प्रोजेक्ट के शुरू होने से क्षेत्र में हजारों की संख्या में युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।

    ₹2,500 करोड़ का होगा भारी-भरकम निवेश

    डिफेंस के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने वाला यह विशाल मिसाइल इकोसिस्टम शिवपुरी जिले के पाली गांव में बनने जा रहा है। इसका निर्माण 'अडाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी' द्वारा किया जा रहा है, जो करीब 103.18 हेक्टेयर भूमि पर फैला होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी कुल ₹2,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है।

    इस मेगा प्रोजेक्ट की मदद से क्षेत्र के 10,050 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार से जोड़ा जाएगा। प्लांट में सिंगल, डबल और ट्रिपल बेस प्रोपेलेंट के साथ-साथ वारहेड (मिसाइल के अग्रभाग) में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक विस्फोटक तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही, यहाँ मिसाइल निर्माण से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को एक ही जगह विकसित किया जाएगा।

    चार प्रमुख चरणों में पूरी होगी मिसाइल निर्माण की प्रक्रिया

    इस अत्याधुनिक डिफेंस कॉम्प्लेक्स में मिसाइल तैयार करने और सेना तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को चार मुख्य चरणों में बांटा गया है:

    • पहला चरण: सबसे पहले इस इंटीग्रेटेड कैंपस के भीतर प्रोपेलेंट, टीएनटी (TNT) और युद्ध में इस्तेमाल होने वाली अन्य जरूरी सामग्रियां तैयार की जाएंगी।

    • दूसरा चरण: परिसर के भीतर ही तैयार किए गए इन कंपोनेंट्स और प्रोडक्ट की मदद से पूरी तरह तैयार यानी 'मिशन रेडी' मिसाइलों का निर्माण किया जाएगा।

    • तीसरा चरण: पूरी तरह ऑटोमेटेड (स्वचालित) तकनीक का इस्तेमाल करके एक साथ कई तरह के मिसाइल प्रोग्रामों का संचालन और नियंत्रण किया जाएगा।

    • आखिरी चरण: यहाँ पूरी तरह बनकर और टेस्ट होकर तैयार हुईं मिसाइलों की सीधी आपूर्ति भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना को की जाएगी।

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