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    Homeराजनीतिनई पार्टी के नाम पर अड़चन, के. कविता को करना होगा बदलाव

    नई पार्टी के नाम पर अड़चन, के. कविता को करना होगा बदलाव

    नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की पूर्व नेता के. कविता को उनकी नई राजनीतिक पार्टी का नाम बदलने का कड़ा निर्देश जारी किया है। आयोग ने उन्हें स्पष्ट चेतावनी देते हुए 15 दिनों का समय दिया है, जिसके भीतर उन्हें अपनी पार्टी के लिए तीन नए वैकल्पिक नाम सुझाने होंगे। यदि वे इस निर्धारित समय सीमा के अंदर नए नाम प्रस्तावित नहीं करती हैं, तो उनकी पार्टी के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के आवेदन को सीधे रद्द किया जा सकता है।

    क्यों फंसा नाम का पेंच और क्या थी बीआरएस की आपत्ति?

    दरअसल, के. कविता ने अपनी इस नवगठित पार्टी का नाम 'तेलंगाना रक्षणा सेना' रखा था, जिसका संक्षिप्त रूप (एक्रोनॉमी) 'टीआरएस' (TRS) बनता है। विवाद की मुख्य वजह यही संक्षिप्त नाम है, क्योंकि पहले मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पार्टी 'तेलंगाना राष्ट्र समिति' को भी 'टीआरएस' के नाम से ही जाना जाता था, जिसका नाम बाद में बदलकर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) कर दिया गया था। इस नाम की समानता को लेकर बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव और वरिष्ठ नेता के. टी. रामाराव ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था और इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।

    मतदाताओं में भ्रम की आशंका और आयोग को मिलीं 1,100 आपत्तियां

    मिली जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग को इस नए दल के नाम और उसके संक्षिप्त रूप 'टीआरएस' को लेकर जनता और राजनीतिक हलकों से 1,100 से अधिक शिकायतें व आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। विरोध करने वालों का मुख्य तर्क था कि एक जैसे शॉर्ट फॉर्म (TRS) का उपयोग करने से आगामी चुनावों के दौरान आम मतदाताओं के बीच भारी असमंजस और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका सीधा असर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इन तमाम शिकायतों और व्यावहारिक दिक्कतों को सही मानते हुए ही आयोग ने यह कदम उठाया है।

    15 दिनों का अल्टीमेटम और पंजीकरण रद्द होने का खतरा

    निर्वाचन आयोग ने अपने आधिकारिक आदेश में यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि के. कविता को तय समय सीमा यानी 15 दिनों के अंदर ही तीन नए और पूरी तरह अलग नाम आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। इन तीन विकल्पों के आने के बाद चुनाव आयोग स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत सबसे उपयुक्त नाम पर विचार कर उसे अपनी मंजूरी देगा। बहरहाल, यदि इस अवधि के भीतर नए नाम नहीं भेजे गए, तो पार्टी को पंजीकृत कराने की उनकी पूरी कानूनी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया जाएगा।

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