मुंबई| महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की मांग का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि गरबा पंडालों में प्रवेश देने से पहले प्रत्येक व्यक्ति के पहचान पत्र की गहन जांच की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने आयोजनों में प्रवेश से पूर्व हनुमान चालीसा का पाठ कराने का भी सुझाव दिया। उनका दावा है कि इस प्रकार के सांस्कृतिक उत्सवों के दौरान 'लव जिहाद' जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
पहचान पत्र जांचने और तिलक लगाने की मांग
वीएचपी ने महाराष्ट्र में नवरात्रि उत्सव को लेकर आयोजकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन सुझावों में प्रतिभागियों के पहचान पत्र की अनिवार्य रूप से जांच करने और प्रवेश द्वार पर माथे पर तिलक लगाने की बात शामिल है। संगठन का कहना है कि जो लोग मूर्ति पूजा और सनातन परंपराओं में विश्वास नहीं रखते, उन्हें ऐसे धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों से दूर रहना चाहिए।
'लव जिहाद' के दावों पर नितेश राणे का बयान
नितेश राणे ने आरोप लगाया कि त्योहारों के इस मौसम में असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर 'लव जिहाद' के मामलों को बढ़ावा दिया जाता है। इसी तर्क का हवाला देते हुए उन्होंने गरबा स्थलों पर सख्त सुरक्षा और पहचान की जांच को जरूरी ठहराया है, ताकि आयोजनों की पवित्रता बनी रहे।
ध्वनि प्रदूषण, डीजे नियम और अन्य नेताओं पर निशाना
गणेश उत्सव में डीजे बजाने पर लगी रोक का जिक्र करते हुए राणे ने मांग की कि प्रशासनिक नियम सभी धर्मों के जुलूसों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू समुदाय अदालत के आदेशों और नियमों का पालन करता है, जबकि अन्य आयोजनों में देर रात तक तेज आवाज में संगीत बजाया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर हिंदू मान्यताओं की आलोचना करने और संस्कृति को धूमिल करने का आरोप भी लगाया।
दिशा सालियान मामले को लेकर घेराबंदी
दिशा सालियान प्रकरण का उल्लेख करते हुए राणे ने विपक्षी नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के बाद अब इस मामले की पूरी सच्चाई और सभी पहलू सार्वजनिक होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि एक महिला को न्याय दिलाने का है।


