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    ‘मोदी है तो मुमकिन है’: 900 दिनों में हकीकत बना छह दशक पुराना सपना : अश्विनी वैष्णव

    अहमदाबाद| केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक दिन को भारत के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि पिछले छह दशकों से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जो सपना देखा गया था, वह आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प से साकार हुआ है। मात्र 900 दिनों में फाउंडेशन से प्रोडक्शन तक की यात्रा ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के मंत्र को चरितार्थ करती है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर एक फाउंडेशनल इंडस्ट्री है। मोबाइल, लैपटॉप और सर्वर जैसे हर आधुनिक उपकरण के लिए चिप्स अनिवार्य हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग छह गुना और निर्यात आठ गुना बढ़ा है। अब ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ के तहत भारत केवल चिप डिजाइन ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, मशीनरी, केमिकल्स और गैस सहित पूरा इकोसिस्टम देश में ही विकसित करेगा। आज देश की 315 से अधिक विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी चिप डिजाइन में सक्रिय हैं, जो विकसित भारत की मजबूत नींव का संकेत है।

    भारत-अमेरिका संबंधों का प्रतीक बना प्लांट
    भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस अवसर को भारत-अमेरिका के मजबूत संबंधों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह प्लांट केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि अमेरिकी तकनीक और भारत की उत्पादन क्षमता के समन्वय का भविष्य है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने विशेष रूप से गुजरात के साणंद से धोलरा तक विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल अन्य देशों और निवेशकों के लिए भी प्रेरणादायक है। अमेरिकी कंपनियां गुजरात की संभावनाओं को सकारात्मक दृष्टि से देख रही हैं।

    ‘यह उद्घाटन नहीं, इतिहास की अमर क्षण’ – माइक्रोन सीईओ
    माइक्रोन टेक्नोलोजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने भावुक स्वर में कहा कि यह केवल एक उद्घाटन नहीं, बल्कि इतिहास की अमर क्षण है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल से मिली प्रेरणा का उल्लेख करते हुए कहा कि जो कभी असंभव लगता था, वह आज साणंद की धरती पर साकार हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में डेटा हृदय के समान है और डेटा के लिए मेमोरी व स्टोरेज अनिवार्य हैं। माइक्रोन का यह प्लांट हर वर्ष करोड़ों चिप्स का उत्पादन कर वैश्विक जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्लांट में 100 प्रतिशत जल पुनः उपयोग (वॉटर री-यूज) और सस्टेनेबिलिटी के उच्च मानकों का पालन किया जा रहा है। गर्व से उन्होंने कहा, “जब लोग पूछते थे कि क्या भारत में विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर सुविधा बन सकती है? मेरा जवाब है – हां, संभव है!”

    एआई युग के लिए अत्याधुनिक उत्पादन
    माइक्रोन के इस मेगा प्लांट में एसएसडी (सॉलिड स्टेट ड्राइव), डीआरएएम और एनएएनडी जैसे आधुनिक स्टोरेज व मेमोरी उपकरणों का निर्माण होगा। एआई आधारित प्रणालियों के लिए मजबूत मेमोरी सपोर्ट अनिवार्य है, ऐसे में यह उत्पादन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह प्लांट दुनिया के सबसे बड़े और अत्यंत स्वच्छ क्लीनरूम सुविधाओं में शामिल है, जहां ऑपरेशन थिएटर से भी अधिक शुद्ध वातावरण में चिप पैकेजिंग की जाती है।

    रोजगार और समावेशन की नई मिसाल
    वर्तमान में प्लांट में 2000 कर्मचारी कार्यरत हैं, जो आने वाले समय में बढ़कर 5000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार तक पहुंचेंगे। विशेष बात यह है कि दिव्यांग नागरिकों को भी ऑपरेटर और टेक्नीशियन के रूप में समान अवसर दिए गए हैं। उद्घाटन समारोह में गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद एवं विधायक, मुख्य सचिव एम.के. दास और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव पी. भारती सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। भारत अब वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर मजबूती से उभर चुका है और साणंद से शुरू हुई यह यात्रा विकसित भारत के तकनीकी भविष्य की नई इबारत लिख रही है।

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