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    अगर घर में शिवलिंग गलत दिशा में रखी है तो हो जाएं सतर्क, वरना छिन सकती है सकारात्मकता

    भगवान शिव यानी भोलेनाथ, वो शक्ति जो पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा को संतुलित रखती है. कहते हैं, जहां शिव का वास होता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा टिक नहीं पाती और घर में सुख-शांति का माहौल बना रहता है. शायद इसीलिए कई लोग अपने घरों में शिव जी की मूर्ति या शिवलिंग की स्थापना करते हैं ताकि माहौल सकारात्मक रहे और जीवन में स्थिरता बनी रहे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव जी की मूर्ति या शिवलिंग को घर में कहीं भी रख देना ठीक नहीं होता? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर मूर्ति सही दिशा में रखी जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, लेकिन गलत दिशा में रखने पर इसका उलटा असर भी पड़ सकता है. शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करने के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं – जैसे किस दिशा में रखना शुभ है, मूर्ति कैसी होनी चाहिए, और किन बातों से बचना जरूरी है. अगर आप भी अपने घर में भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग रखने की सोच रहे हैं, तो वास्तु से जुड़ी ये बातें जान लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी आपके घर की ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं

    भगवान शिव की मूर्ति की सही दिशा
    वास्तु शास्त्र के मुताबिक, भगवान शिव की मूर्ति उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में रखनी चाहिए. यह दिशा देवताओं की मानी जाती है और शिव जी के वास की दिशा भी यही है. जब मूर्ति इस दिशा में होती है, तो घर में सुख, शांति और आपसी मेलजोल बढ़ता है.
    मूर्ति को इस तरह स्थापित करें कि शिव जी का मुख दक्षिण दिशा की ओर रहे. इसका कारण यह है कि शिव जी का दक्षिण दिशा से गहरा संबंध है, और इस दिशा से घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है. अगर मूर्ति गलत दिशा में रखी गई तो घर के सदस्यों के बीच तनाव या अनबन की स्थिति भी बन सकती है, इसलिए दिशा तय करते समय कंपास या वास्तु सलाहकार की मदद लेना अच्छा रहेगा.

    कैसी हो शिव जी की मूर्ति?
    मूर्ति का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए. घर के मंदिर के लिए 5 से 8 इंच की मूर्ति सबसे बेहतर मानी जाती है. बहुत बड़ी मूर्ति मंदिर के आकार और घर की ऊर्जा पर भारी पड़ सकती है.

     घर में शिवलिंग रखने के नियम

    सामग्री की बात करें तो मूर्ति पत्थर, पीतल, क्रिस्टल या पंचधातु की बनी हो तो ज्यादा शुभ मानी जाती है. इन धातुओं में प्राकृतिक ऊर्जा होती है जो वातावरण को शांत और संतुलित बनाती है.
    ध्यान रहे, मूर्ति शांत या ध्यानमग्न मुद्रा में होनी चाहिए. घर के मंदिर में तांडव मुद्रा वाली मूर्ति नहीं रखनी चाहिए क्योंकि यह मुद्रा ऊर्जा को अस्थिर कर देती है और घर के माहौल में बेचैनी ला सकती है.
    घर में शिवलिंग रखने के नियम
    अगर आप मूर्ति की जगह शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं, तो उसके लिए भी कुछ नियम हैं.
    शिवलिंग को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखें. शिवलिंग के नीचे योनिपीठ (आधार भाग) होना चाहिए और जलाधारी का मुख उत्तर दिशा की ओर रहना जरूरी है.
    हर सुबह शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है. इससे घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है और नकारात्मकता खत्म होती है.
    एक बात और – घर में एक ही शिवलिंग रखें. कई शिवलिंग एक साथ रखने से ऊर्जा असंतुलित हो जाती है और वास्तु के हिसाब से यह ठीक नहीं माना जाता.
    मूर्ति की जगह और प्लेटफॉर्म का ध्यान रखें
    भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को कभी भी सीधे फर्श पर न रखें. इसे लकड़ी या संगमरमर के छोटे मंच पर रखें. इससे मूर्ति ऊंचाई पर रहेगी और ऊर्जा का प्रवाह सही दिशा में जाएगा.
    मूर्ति के आसपास हमेशा साफ-सफाई रखें और वहां जूते-चप्पल या गंदे कपड़े न रखें, अगर आप वहां दीपक जलाते हैं, तो उसे भी पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. घर में भैरव या तांडव मुद्रा वाली मूर्तियां रखने से बचें क्योंकि यह घर की शांति में बाधा डाल सकती हैं.
    मूर्ति की देखभाल और श्रद्धा का महत्व
    मूर्ति या शिवलिंग केवल सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि श्रद्धा और ऊर्जा का प्रतीक है. इसलिए जब भी पूजा करें, मन को शांत रखकर करें. पूजा के समय जल्दबाज़ी न करें और मूर्ति को रोज़ गंगाजल से साफ करें. अगर किसी वजह से मूर्ति टूट जाए, तो उसे तुरंत हटाकर किसी मंदिर या नदी में प्रवाहित कर दें. टूटी मूर्ति को घर में रखना अशुभ माना जाता है.

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