More
    Homeधर्म-समाजअसहनीय कष्ट में करें हनुमान बाहुक पाठ, बजरंगबली हर लेंगे संकट

    असहनीय कष्ट में करें हनुमान बाहुक पाठ, बजरंगबली हर लेंगे संकट

    हिंदू धर्म और भक्ति साहित्य में हनुमान बाहुक का विशेष महत्व है। इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने उस समय की थी, जब वे कलियुग के प्रकोप से उत्पन्न अपने हाथों की असहनीय पीड़ा (गंभीर वात रोग) से त्रस्त थे। यह स्तोत्र न केवल हनुमान जी की शक्ति का गुणगान करता है, बल्कि शारीरिक कष्टों से मुक्ति के लिए एक अचूक उपाय माना जाता है।


    हनुमान बाहुक: एक परिचय

    • रचनाकार: गोस्वामी तुलसीदास

    • छंदों की संख्या: 44

    • मुख्य उद्देश्य: शारीरिक कष्ट, हड्डियों का दर्द, अज्ञात भय और रोगों से मुक्ति।

    • ऐतिहासिक संदर्भ: कहा जाता है कि जब तुलसीदास जी को बाहु (हाथ) में भयंकर दर्द हुआ, तब उन्होंने हनुमान जी की शरण में जाकर इन छंदों का गान किया और वे पूर्णतः स्वस्थ हो गए।


    हनुमान बाहुक पाठ की विधि

    यदि आप किसी विशेष रोग या कष्ट निवारण के लिए इसका पाठ कर रहे हैं, तो निम्नलिखित विधि अपनाना फलदायी होता है:

    1. दिन: मंगलवार या शनिवार से पाठ शुरू करना सबसे उत्तम है।

    2. संकल्प: कम से कम 21 या 40 दिनों तक नियमित पाठ करने का संकल्प लें।

    3. पूजा स्थान: हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं।

    4. जल का पात्र: पाठ करते समय एक तांबे के पात्र में जल भरकर सामने रखें। पाठ संपन्न होने के बाद उस जल को पीड़ित व्यक्ति को पिलाएं या स्वयं ग्रहण करें।

    5. सावधानी: पाठ के दौरान शुद्धता का ध्यान रखें और तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से परहेज करें।


    हनुमान बाहुक के लाभ

    • शारीरिक स्वास्थ्य: गठिया, वात, हड्डियों का दर्द और मांसपेशियों की जकड़न में इसे रामबाण माना जाता है।

    • मानसिक शक्ति: यह अज्ञात भय, घबराहट और नकारात्मक विचारों को दूर कर आत्मविश्वास बढ़ाता है।

    • ग्रह दोष: शनि या मंगल के अशुभ प्रभाव को कम करने में भी यह स्तोत्र सहायक है।

    • विपत्ति नाश: जीवन में आए आकस्मिक संकटों और बाधाओं को दूर करने की शक्ति इसमें निहित है।


    विशेष छंद का सार (छंद 20-21)

    तुलसीदास जी इन छंदों में हनुमान जी से आर्त भाव से प्रार्थना करते हैं कि हे महावीर! जैसे आपने प्रभु श्री राम के काज संवारे हैं, वैसे ही मुझ दीन सेवक की बाहु-पीड़ा (हाथ का दर्द) को भी शीघ्र दूर करें।

    निष्कर्ष: "हनुमान बाहुक" केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। जब दवाइयां काम नहीं करतीं, तब बहुत से भक्त "हनुमान बाहुक" के माध्यम से ईश्वरीय कृपा का अनुभव करते हैं।


    जय हनुमान!

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here