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    न्याय प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की पहल, जबलपुर से शुरू हुआ नया बदलाव

    जबलपुर | आम नागरिकों के लिए अदालती कार्यवाही और न्याय के रास्ते को आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए बेहद सुगम व सरल बनाने के उद्देश्य से आज संस्कारधानी जबलपुर में एक भव्य सेमिनार का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इनके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आठ न्यायाधीशों और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायिक जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि हमारा अंतिम ध्येय तकनीक नहीं बल्कि न्याय है, लेकिन तकनीक उस न्याय तक पहुँचने का सबसे छोटा और सुलभ प्रवेश द्वार है।

    मूकबधिरों और जजों के लिए दो नए डिजिटल सॉफ्टवेयर लॉन्च

    इस सेमिनार के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न्याय प्रणाली को डिजिटल रूप देने के लिए 'संकेत वाणी' और 'ज्योति जर्नल 2.0' नाम के दो अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर लॉन्च किए। 'संकेत वाणी' एप्लिकेशन को विशेष रूप से मूकबधिर लोगों के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अदालती प्रक्रिया को समझ सकें और अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। वहीं, 'ज्योति जर्नल 2.0' सॉफ्टवेयर प्रदेश के न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के लिए मददगार साबित होगा। यह मुकदमों की त्वरित सुनवाई, सटीक कानूनी विश्लेषण और फैसले लिखने में सहायता करेगा। इस सॉफ्टवेयर में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स के हजारों ऐतिहासिक फैसले, सरकारी सर्कुलर और कानूनी आलेख इनबिल्ट किए गए हैं।

    'अस्पतालों की तरह 24 घंटे मिलनी चाहिए न्याय की सुविधा'

    सेमीनार को संबोधित करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक बड़ा विचार सामने रखा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश में मरीजों के लिए अस्पतालों के दरवाजे 24 घंटे खुले रहते हैं, ठीक उसी तर्ज पर आम जनता को भी 24 घंटे न्याय की सुविधा मिलनी चाहिए। सीजीआई ने न्याय प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ने और इसका एकीकरण करने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और राज्य सरकार के आपसी तालमेल की जमकर तारीफ की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मध्य प्रदेश द्वारा किए गए इन बेहतरीन डिजिटल नवाचारों  को देश के अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों में भी लागू करने के प्रयास किए जाएंगे।

    कानूनी व्यवस्था में एआई (AI) बनेगा गेम चेंजर, ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस

    मुख्य न्यायाधीश ने आने वाले समय में न्यायिक प्रणाली के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने की घोषणा करते हुए कहा कि इस पर काम शुरू हो चुका है और जल्द ही इसे आधिकारिक तौर पर पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में एआई टेक्नोलॉजी एक 'गेम चेंजर' की भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही उन्होंने जजों से अपील की कि इन डिजिटल टूल्स का लाभ ग्रामीण इलाकों के लोगों तक उनकी स्थानीय भाषा में पहुँचाया जाए, क्योंकि आज भी ग्रामीण तबका ऑनलाइन सिस्टम को थोड़ा पेचीदा समझता है। उन्होंने साफ किया कि न्यायपालिका और आम जनता के बीच की दूरी को मिटाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है, जिसमें तकनीक एक मजबूत सेतु का काम कर रही है।

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