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    त्विषा शर्मा मामले में जांच जारी, गिरिबाला-समर्थ को फिर रिमांड पर लेने की तैयारी

    भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और हाईप्रोफाइल 'त्विषा शर्मा दहेज मृत्यु मामले' में आज यानी मंगलवार, 2 जून 2026 का दिन कानूनी और जांच की प्रक्रिया के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। दहेज हत्या (Dowry Death) जैसी गंभीर धाराओं के तहत आरोपी बनाई गईं रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और त्विषा शर्मा के पति व अधिवक्ता समर्थ सिंह की पांच दिन की सीबीआई (CJI) रिमांड आज दोपहर दो बजे समाप्त हो रही है। सीबीआई की टीम दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर तीन दिन की अतिरिक्त रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आरोपी पक्ष के वकीलों ने इसका कड़ा विरोध करने की रणनीति बना ली है।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीआई की दिल्ली यूनिट से फॉरेंसिक विशेषज्ञों (Forensic Experts) की टीम विशेष रूप से भोपाल पहुंची थी। इस टीम ने घटनास्थल का पूरा री-क्रिएशन (Crime Scene Re-creation) कराया है और कई वैज्ञानिक व तकनीकी सबूत जुटाए हैं।

    एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चोटों पर आरोपियों की चुप्पी

    सीबीआई पिछले पांच दिनों से पूर्व जज और उनके बेटे से लगातार कड़ाई से पूछताछ कर रही है, लेकिन जांच एजेंसी को अब तक त्विषा शर्मा के शरीर पर मिले चोटों के निशानों को लेकर कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला है:

    • आरोपियों का दावा: पूछताछ में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने इन चोटों को लेकर अनभिज्ञता जताई है। उनका कहना है कि संभवतः शव को फंदे से नीचे उतारते समय ये चोटें लगी होंगी।

    • पोस्टमार्टम रिपोर्ट की हकीकत: भोपाल एम्स (AIIMS Bhopal) की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट आरोपियों के दावों पर सवाल खड़े करती है। इस रिपोर्ट में त्विषा के सिर में गंभीर चोट और खून के थक्के (क्लॉटिंग) जमने का साफ उल्लेख है। इसके अलावा शरीर पर लगभग आधा दर्जन अन्य चोटों का भी जिक्र है।

    • स्पेशल रिपोर्ट का इंतजार: इस उलझन को सुलझाने के लिए दिल्ली एम्स की विशेषज्ञ टीम द्वारा दोबारा पोस्टमार्टम और विसरा की जांच कराई गई थी, जिसकी फाइनल रिपोर्ट का जांच एजेंसी अभी भी इंतजार कर रही है।

    इन 5 प्रमुख बिंदुओं पर टिकी है सीबीआई की जांच

    चूंकि मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह खुद 35 वर्षों से अधिक समय तक न्यायिक सेवा में (जज के पद पर) रह चुकी हैं, इसलिए उनके बयान कानूनी रूप से बेहद संतुलित और नपे-तुले हैं। यही वजह है कि सीबीआई मौखिक बयानों के बजाय डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों को ज्यादा मजबूत करने में जुटी है। फिलहाल जांच इन अहम बिंदुओं पर टिकी है:

    • व्हाट्सएप चैट: त्विषा शर्मा ने मौत से पहले अपनी व्हाट्सएप चैट में जो गंभीर आरोप लगाए थे, उनकी गहनता से जांच हो रही है।

    • विरोधाभासी बयान: मां-बेटे (गिरिबाला और समर्थ) के बयानों में सामने आ रहे विरोधाभासों को लेकर क्रॉस-क्वेश्चनिंग की जा रही है।

    • सबूतों से छेड़छाड़: क्या घटना के तुरंत बाद सबूतों और घटनास्थल के साथ कोई छेड़छाड़ की गई थी?

    • सीसीटीवी और डिजिटल फुटप्रिंट: घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों के डिजिटल डेटा की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है।

    आगे क्या? सीबीआई का मानना है कि इस हाईप्रोफाइल केस में कोर्ट के सामने एक अभेद्य चार्जशीट पेश करने के लिए आरोपियों से अभी और पूछताछ जरूरी है। अब दोपहर दो बजे भोपाल की विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं कि कोर्ट आरोपियों की रिमांड बढ़ाती है या उन्हें न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजती है।

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