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    जयपुर रिंग रोड प्रोजेक्ट: 10 तहसीलों से होकर गुजरेगी 6-लेन सड़क

    जयपुर/बस्सी। गुलाबी नगरी जयपुर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने वाली बहुप्रतीक्षित 'उत्तरी रिंग रोड परियोजना' अब हकीकत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। जिला प्रशासन ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए भूमि अवाप्ति (जमीन अधिग्रहण) की कागजी और जमीनी कार्रवाई को काफी तेज कर दिया है। जयपुर रिंग रोड (उत्तर) के सक्षम प्राधिकारी ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर इससे जुड़ी सभी तहसीलों के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

    100 किलोमीटर लंबा होगा रूट, इन 10 तहसीलों से गुजरेगी रिंग रोड

    प्रस्तावित उत्तरी रिंग रोड का दायरा करीब 100 किलोमीटर लंबा होगा। यह मेगा प्रोजेक्ट बस्सी, जमवारामगढ़, सांगानेर, मौजमाबाद, जोबनेर, कालवाड़, जालसू, रामपुरा डाबड़ी, चौमूं और आमेर जैसी 10 प्रमुख तहसीलों से होकर गुजरेगा। इस बाईपास का मुख्य उद्देश्य जयपुर शहर के चारों तरफ एक मजबूत ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार करना है। वर्तमान में रिंग रोड का दक्षिणी हिस्सा पूरी तरह चालू है और उत्तरी हिस्सा बनते ही जयपुर का रिंग रोड नेटवर्क पूरी तरह से कंप्लीट हो जाएगा।

    शहर को मिलेगा भारी वाहनों के जाम और प्रदूषण से छुटकारा

    इस बाईपास के पूरी तरह तैयार होने के बाद जयपुर शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव बेहद कम हो जाएगा। बाहरी राज्यों और जिलों से आने वाले भारी ट्रक व कमर्शियल वाहन शहर के अंदर एंट्री किए बिना ही बाहर से अपने गंतव्य की ओर निकल सकेंगे। इससे अजमेर रोड, टोंक रोड, आगरा रोड और दिल्ली रोड को जोड़ने वाले प्रमुख चौराहों पर जाम की स्थिति खत्म होगी। साथ ही, आम जनता के समय और ईंधन की बचत होगी और शहर में प्रदूषण के स्तर में भी बड़ी गिरावट आएगी। यातायात विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट जयपुर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए एक बड़ा 'गेम चेंजर' साबित होगा।

    जमीन सत्यापन और सर्वे के लिए संयुक्त टीमों का गठन

    प्रशासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3 (डी) के तहत जमीन अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत अब प्रभावित इलाकों में जमीन का सत्यापन, सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड खंगालने का काम युद्ध स्तर पर किया जाएगा। पटवारी, भू-अभिलेख निरीक्षक और तकनीकी टीमों को संयुक्त रूप से मौके पर जाकर सर्वे करने को कहा गया है। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपें ताकि निर्माण कार्य में कोई देरी न हो।

    ग्रामीण इलाकों में खुलेंगे रोजगार के द्वार, प्रशासन ने दिया निष्पक्ष मुआवजे का भरोसा

    इस रिंग रोड के बनने से बस्सी समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सूरत बदलने वाली है। सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने से इन इलाकों में नए औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स हब और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होंगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। भूमि अधिग्रहण को लेकर सक्षम प्राधिकारी एवं अतिरिक्त कलक्टर-द्वितीय मेवाराम सिंह मीणा ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और सभी प्रभावित जमीन मालिकों व किसानों को नियमानुसार उचित और पूरा मुआवजा दिया जाएगा।

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