लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का इस वर्ष का तीसरा मानसून सत्र आगामी तीन से छह अगस्त के बीच आहूत किए जाने के आधिकारिक प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। इस आगामी सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बहुप्रतीक्षित अनुपूरक बजट (सप्लीमेंट्री बजट), कई महत्वपूर्ण अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक तथा अन्य जरूरी विधायी कार्यों को सदन के पटल पर रखा जाएगा। इसके अलावा, इस सत्र का सबसे बड़ा और प्रमुख आकर्षण बहुचर्चित 'संभल हिंसा 2024' की न्यायिक जांच रिपोर्ट होगी, जिसे आधिकारिक रूप से सदन के पटल पर प्रस्तुत किया जाएगा।
संवैधानिक बाध्यता के तहत तीन से छह अगस्त तक चलेगा विधानमंडल का सत्र
प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मीडिया को जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य विधानमंडल का पिछला यानी द्वितीय सत्र गत 30 अप्रैल को आहूत किया गया था, लेकिन उसी दिन विधानसभा और विधान परिषद की बैठक संपन्न होने के तुरंत बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इसके उपरांत, आगामी 7 मई 2026 को औपचारिक रूप से सत्रावसान कर दिया गया था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद-174 और उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, राज्य विधानमंडल के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए। इसी संवैधानिक अनिवार्यता और व्यवस्था का पालन करते हुए सरकार ने यह नया सत्र बुलाने का यह निर्णय लिया है।
संभल हिंसा की 450 पन्नों की बहुचर्चित न्यायिक जांच रिपोर्ट होगी सदन में पेश
इस आगामी सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को भड़की भीषण हिंसा और उपद्रव से जुड़ी बहुचर्चित न्यायिक जांच रिपोर्ट को अनिवार्य रूप से सदन के पटल पर रखा जाएगा। इस जांच आयोग ने अपनी विस्तृत और सनसनीखेज 450 पन्नों की रिपोर्ट बीते वर्ष 28 अगस्त को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में संभल शहर की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को एक सुनियोजित साजिश के तहत बदलने के कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।
जापान और देश के इतिहास का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 45 प्रतिशत हिंदू आबादी निवास करती थी, जो घटकर वर्तमान समय में महज 15 प्रतिशत ही रह गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जनसांख्यिकी में आए इस भारी बदलाव की मुख्य वजह लगातार हुई हिंसा, पलायन और हिंदुओं का नरसंहार रहा है। सुनियोजित दंगों, लव जिहाद के मामलों और जबरन धर्मांतरण के कुत्सित प्रयासों के जरिए इस क्षेत्र में हिंदू आबादी को सुनियोजित ढंग से कम किया गया है।
रिपोर्ट में विदेशी बनाम देसी मुसलमानों का संघर्ष और 15 दंगों का काला इतिहास
न्यायिक जांच आयोग की इस रिपोर्ट में यह भी बेहद अहम दावा किया गया है कि जब किसी क्षेत्र में हिंदू आबादी घटकर 20 प्रतिशत से भी कम हो जाती है, तो वहां किस प्रकार के आंतरिक संघर्ष शुरू हो जाते हैं। संभल में भी हिंदू आबादी घटने के बाद 'विदेशी बनाम देसी मुसलमान' का आंतरिक संघर्ष शुरू हो गया, जहां तुर्क और कन्वर्टेड हिंदू पठान आपस में वर्चस्व की लड़ाई लड़ने लगे।
इस रिपोर्ट में पिछले सात दशकों के दौरान संभल में हुए कुल 15 बड़े दंगों का सिलसिलेवार जिक्र किया गया है। इसके अलावा, शहर के 68 प्राचीन तीर्थस्थलों और 19 पावन कूपों (कुओं) पर अवैध कब्जे किए जाने का गंभीर उल्लेख भी इसमें शामिल है। रिपोर्ट में ऐतिहासिक हरिहर मंदिर का भी विशेष तौर पर जिक्र किया गया है, जिसके अवशेषों और साक्ष्यों से बाबर के शासनकाल से जुड़े संकेत मिले थे।
जांच रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि संभल क्षेत्र में कई खतरनाक आतंकवादी संगठन अंदरखाने अपनी जड़ें जमा चुके हैं, विशेष रूप से इसमें आसिम उर्फ सना-उल-हक की संलिप्तता और उसकी संदिग्ध भूमिका को रेखांकित किया गया है, जिसे अमेरिका द्वारा पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है। इसके साथ ही, रिपोर्ट में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि संभल के भीतर अवैध हथियारों की तस्करी और मादक पदार्थों (ड्रग्स) का काला कारोबार बहुत तेजी से पैर पसार रहा है और पनप रहा है।


