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    TMC में बड़ा झटका? ममता की करीबी सांसद काकोली घोष के इस्तीफे की चर्चा तेज

    कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगने के आसार दिखाई दे रहे हैं। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली बारासात से चार बार की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार अब सांसद पद से इस्तीफा दे सकती हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने टीएमसी के जिला पदाधिकारी और महिला मोर्चा के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। फलता सीट पर मिली करारी हार के बाद उपजे इस नए संकट से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

    बेटे ने दिए सांसद पद छोड़ने के संकेत

    काकोली घोष दस्तीदार के बेटे वैद्यनाथ घोष ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए संकेत दिए हैं कि उनकी मां जल्द ही लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले कुछ समय में ममता बनर्जी सरकार के दौरान हुए कई बड़े घोटालों और प्रशासनिक गड़बड़ियों ने उनके परिवार की सामाजिक छवि को गहरी चोट पहुंचाई है। बारासात लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से टीएमसी को छह सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा है, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और राज्य में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए काकोली घोष ने यह बड़ा कदम उठाया है।

    भ्रष्टाचार और घोटालों से नाराज था परिवार

    पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को उजागर करते हुए उनके परिवार ने हालिया घोटालों का खुलकर जिक्र किया है। उनके अनुसार, पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के कार्यकाल में सरकारी नौकरियां बेची गईं, जिससे राज्य के लाखों योग्य युवा बेरोजगार हो गए। इसके अलावा, ज्योतिप्रिय मल्लिक को राशन घोटाले में गिरफ्तार किया गया और आरजी कर अस्पताल की संवेदनशील घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। इन तमाम मामलों के कारण एक शिक्षित और सम्मानित परिवार होने के नाते उन पर भी उंगलियां उठ रही थीं, जिसके चलते सिर्फ निजी पारिवारिक रिश्तों की वजह से अब तक चुप रहीं काकोली घोष ने आखिरकार अपना कड़ा स्टैंड ले लिया है।

    बीजेपी में जाने की चर्चा और आंतरिक कलह

    काकोली घोष दस्तीदार के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलों को उनके परिवार ने फिलहाल खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह किसी दूसरी पार्टी में जाने का मामला नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सैद्धांतिक लड़ाई है। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में काकोली घोष को वाई (Y) श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने के बाद से राजनीतिक कयासों का दौर जारी है। गौर करने वाली बात यह भी है कि लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने और उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त किए जाने के कुछ दिनों बाद ही काकोली घोष ने टीएमसी प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को अपना त्यागपत्र भेजा है, जो पार्टी के भीतर की गहरी दरार को साफ दर्शाता है।

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