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    स्कूली शिक्षा में बड़ा कदम: पहाड़े, बारहखड़ी और हिंदी-अंग्रेजी रीडिंग पर रहेगा विशेष फोकस

    रायपुर। मंत्रालय स्थित महानदी भवन में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने प्रदेश में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के संबंध में कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। बैठक में छात्र-छात्राओं की बुनियादी दक्षता और समझ को विकसित करने वाले व्यावहारिक उपायों को तत्काल धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्राथमिक स्तर के बच्चों को अनिवार्य रूप से बारहखड़ी व 20 तक के पहाड़े और माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को कम से कम 25 तक के पहाड़े पूरी तरह याद होने चाहिए। इसके साथ ही, सरकारी स्कूलों के बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में बिना अटके धाराप्रवाह पढ़ना (रीडिंग) आना चाहिए, जिसके लिए पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आगे बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से राज्य के समस्त विद्यालयों में दाखिले की पूरी प्रक्रिया और नए सत्र की शुरुआत हर साल 1 अप्रैल से कर दी जाएगी। इसी निर्धारित तिथि पर छात्र-छात्राओं को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म (गणवेश) और साइकिलों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि प्राइवेट स्कूलों की तरह ही शासकीय विद्यालयों में भी समय पर नियमित रूप से पठन-पाठन का कार्य शुरू किया जा सके।

    ड्रॉपआउट बच्चों की घर वापसी और अटैचमेंट समाप्ति के निर्देश

    शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने के लिए मंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि शाला त्यागी (ड्रॉपआउट) बच्चों को चिह्नित कर आगामी 31 जुलाई तक हर हाल में दोबारा स्कूल में दाखिला दिलाया जाए। इसके अतिरिक्त, जो शिक्षक मूल रूप से अध्यापन कार्य छोड़कर लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों में संलग्न (अटैच) हैं, उनका अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर उन्हें उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में भेजने का आदेश दिया गया है। साथ ही, राज्य के जर्जर स्कूली भवनों को चिह्नित कर उन्हें ढहाने (डिस्मेंटल करने) और जिन स्थानों पर स्कूल के पास खुद की बिल्डिंग नहीं है, वहां जिला कलेक्टर स्तर पर स्थिति की गहन समीक्षा करने को कहा गया है।

    वीएसके एप से हाजिरी अनिवार्य, जुलाई से रुकेगा वेतन

    शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति को लेकर बैठक में वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) एप की कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा की गई। विभागीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान महीने में ऐप का उपयोग न करने पर किसी भी शिक्षक के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, जुलाई महीने से इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी शिक्षकों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और रोजाना की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। जुलाई माह और उसके बाद का मासिक वेतन केवल वीएसके एप में उपलब्ध प्रामाणिक डेटा और उपस्थिति के आधार पर ही कोषालय से जारी किया जाएगा।

    अधोसंरचना विकास और कड़े प्रशासनिक सुधारात्मक कदम

    बैठक के समापन पर विभागीय सचिव और आला अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे इन सभी घोषणाओं और नियमों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। स्कूलों में पेयजल, शौचालय और ब्लैकबोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की भी रैंडम चेकिंग की जाएगी। सरकार का मुख्य ध्येय सरकारी स्कूलों के प्रति आम जनता के विश्वास को दोबारा बहाल करना है, जिसके लिए प्राचार्यों और संकुल प्रभारियों की जवाबदेही तय की जा रही है और लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर सीधे निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा चुकी है।

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