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    फाल्टा हार के बाद ममता का कड़ा संदेश: ‘नतीजे भुगतने होंगे’

    कोलकाता: पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार ने 1,09,021 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से जीत दर्ज की है, जिसे पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी जीत माना जा रही है। इस करारी शिकस्त के बाद मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व पर चौतरफा तीखा हमला बोला है। ममता बनर्जी ने पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए ईवीएम (EVM) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी करने और वोट लूटने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि उनकी पार्टी के लोगों को मतगणना केंद्र (काउंटिंग सेंटर) से जबरन बाहर धकेल दिया गया।

    ममता बनर्जी ने लगाया राज्य प्रायोजित आतंकवाद का आरोप

    मुख्यमंत्री ने बेहद तीखे लहजे में कहा कि आज के शासन में पुलिस निष्पक्ष काम करने के बजाय एक शिकारी की तरह व्यवहार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि फाल्टा में तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों में खुलेआम तोड़फोड़ की जा रही है और टीएमसी कार्यकर्ताओं, खासकर महिला कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ढाढस बंधाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि फाल्टा में जो कुछ भी हुआ है, वह और कुछ नहीं बल्कि पूरी तरह से राज्य प्रायोजित आतंकवाद है। उन्होंने देश की न्यायपालिका से इस मामले में तुरंत दखल देने की भावुक अपील की और सवाल उठाया कि आज के दौर में किसमें ज्यादा ताकत बची है, देश के पवित्र संविधान में या फिर बंदूक की नली में? इसके साथ ही उन्होंने भाजपा को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली की सत्ता से हटने के बाद उन्हें अपने इन सभी कृत्य और तानाशाही का परिणाम भुगतना ही होगा।

    जमानत जब्त होने पर शुभेंदु अधिकारी का तंज

    गौरतलब है कि फाल्टा विधानसभा सीट पर टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में ही पूरी तरह मैदान छोड़ चुके थे, जिसके बाद नतीजों में उनकी जमानत तक जब्त हो गई। टीएमसी की इस ऐतिहासिक और शर्मनाक हार पर तंज कसते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह तो अभी सिर्फ शुरुआत है, आने वाले समय में टीएमसी का पतन इस कदर होगा कि उनके नेतृत्व को चुनाव जीतने के लिए नोटा (NOTA) से मुकाबला करना पड़ेगा। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हार को जनता का फैसला स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है और इस पूरी चुनावी गड़बड़ी के खिलाफ कोर्ट जाकर एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने का कड़ा संकल्प लिया है।

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