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    बच्चों की खुराफाती साजिश! घर छोड़ने के बाद भी करवाते रहे परिजनों की जासूसी

    जयपुर : जयपुर से 14 अगस्त को लापता हुए तीन स्कूली छात्र आठ दिन बाद सुरक्षित घर लौट आए हैं। बच्चों के खुलासे ने पुलिस और परिवार दोनों को हैरान कर दिया। दरअसल, तीनों भागने के बाद अपने ही घरवालों की जासूसी कर रहे थे और इंस्टाग्राम चैटिंग के जरिए पता लगा रहे थे कि परिजन उन्हें कहां-कहां ढूंढ रहे हैं।

    लेटर में लिखा था- ‘पांच साल बाद आएंगे’

    जानकारी के मुताबिक, सांगानेर सदर निवासी दो छात्र और अशोक नगर निवासी उनका चचेरा भाई घर से स्कूल जाने का कहकर निकले थे। तीनों ने घर में फिल्मी अंदाज में लेटर छोड़ा कि 5 साल बाद आएंगे। इसके बाद तीनों ने कपड़े बदले और गांधी नगर रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ ली। टिकट के पैसे के लिए एक छात्र ने अपनी साइकिल 400 रुपये में बेच दी और ऑनलाइन एप से लोन भी लिया।

    एयरप्लेन मोड पर डाला फोन, डिजिटल वॉलेट से किया खर्चा

    परिवार और पुलिस को गुमराह करने के लिए बच्चों ने अपने मोबाइल फोन को ज्यादातर एयरप्लेन मोड पर रखा। जरूरत पड़ने पर ही फोन ऑन करते और तुरंत बंद कर देते। नाबालिगों ने Fampay Wallet एप डाउनलोड कर लिया, जिससे बिना बैंक अकाउंट के ही पैसे का लेन-देन करने लगे। यही कारण रहा कि पुलिस उनकी सही लोकेशन ट्रेस नहीं कर सकी।

    दोस्त से करवा रहे थे जासूसी

    भागने के बाद बच्चे मोहल्ले के ही एक दोस्त से इंस्टाग्राम पर चैट कर रहे थे। एक छात्र ने उससे पूछा कि तेरे मम्मी-पापा से पता कर कि हमारे घरवाले हमें कहां ढूंढ रहे हैं। इस चैट की जानकारी दोस्त के परिवार तक पहुंची, जिसने बच्चों के घरवालों को सूचना दी। इसके बाद तलाश का बड़ा सुराग मिला।
     
    बागेश्वर धाम जाना चाहते थे, पहुंच गए रेवाड़ी

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि तीनों ने रक्षाबंधन के पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान भागने की साजिश रची थी। उनका इरादा मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम जाने का था, लेकिन गलती से हरियाणा के रेवाड़ी जाने वाली ट्रेन में बैठ गए। वहां वे एक धर्मशाला में पांच दिन तक रहे।

    परिवार को नहीं हुआ अंदाजा

    दो छात्रों की बहन गौरी राजावत ने बताया कि हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वे ऐसा कदम उठा सकते हैं। वे रोज की तरह ही बर्ताव कर रहे थे। बच्चों की बुआ शारदा कंवर ने भी कहा कि घर में पैसे रखे थे, लेकिन किसी बच्चे ने चोरी नहीं की। हमें शक है कि किसी ने उन्हें गाइड किया, वरना इतनी योजना छोटे बच्चे अकेले नहीं बना सकते।
     
    ऐसे मिले बच्चे

    आखिरकार आठ दिन बाद बच्चों ने खुद ही एक परिचित से संपर्क किया। भरतपुर के डीग से फोन कर बताया कि हम यहां हैं। इसके बाद परिजन उन्हें लेकर जयपुर लौट आए। वहीं, पुलिस ने बच्चों को घर से भागने के खतरों के बारे में समझाया और माता-पिता को भी सलाह दी कि बच्चों से ज्यादा सवाल-जवाब न करें।

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