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    पुरुष बांझपन के इलाज में नई उम्मीद, AIIMS के डॉक्टरों ने किया सफल प्रयोग

    जोधपुर। एम्स जोधपुर के डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऑब्स्ट्रक्टिव एजूस्पर्मिया यानी जन्मजात प्रजनन मार्ग अवरोध से पीड़ित दंपती को माता-पिता बनने का सुख दिलाया है। संस्थान में पहली बार सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और आईवीएफ-आईसीएसआई तकनीक की मदद से एक स्वस्थ शिशु का सफल जन्म हुआ है। प्रसव के बाद मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।

    समस्या और आधुनिक चिकित्सा का समाधान

    सामान्य स्थिति में कई पुरुषों के शरीर में शुक्राणु तो बनते हैं, लेकिन प्रजनन मार्ग में जन्मजात रुकावट होने के कारण वे वीर्य तक नहीं पहुंच पाते हैं। इस वजह से प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्ति में बाधा आती थी। इस जटिल समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए आधुनिक तकनीक एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है। एम्स के विशेषज्ञों ने सर्जरी के जरिए पुरुष के शरीर से सीधे शुक्राणु निकालकर इस बाधा को पार किया।

    आईवीएफ और आईसीएसआई तकनीक की भूमिका

    अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मनु गोयल के मार्गदर्शन में यह पूरी प्रक्रिया पूरी की गई। सर्जिकल प्रक्रिया से मिले शुक्राणुओं पर आईवीएफ की उन्नत तकनीक यानी इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया के तहत प्रयोगशाला में एक स्वस्थ शुक्राणु को सीधे महिला के अंडाणु में इंजेक्ट किया गया, जिससे निषेचन की प्रक्रिया पूरी हुई।

    सफल गर्भाधान और नया मील का पत्थर

    प्रयोगशाला में विकसित किए गए भ्रूण को इसके बाद महिला के गर्भाशय में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया। प्रक्रिया सफल रहने के बाद महिला ने गर्भधारण किया और नौ महीने की अवधि पूरी होने पर शिशु का जन्म हुआ। चिकित्सा जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि पुरुष बांझपन के इलाज की दिशा में यह उपलब्धि मील का पत्थर साबित होगी और इस समस्या से जूझ रहे अन्य परिवारों के लिए भी रास्ते खुलेंगे।

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