मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के बांद्रा स्थित आवास के बाहर हुई अंधाधुंध गोलाबारी के मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस वारदात को अंजाम देने आए शूटरों को आर्थिक मदद और फंड पहुँचाने के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने डिजिटल बैंकिंग के दुरुपयोग का एक बिल्कुल नया और जटिल तरीका निकाला था। जांच अधिकारियों के अनुसार, गैंग के सदस्यों ने स्थानीय ऑटो चालकों और छोटे दुकानदारों के डिजिटल पेमेंट यानी यूपीआई क्यूआर कोड (UPI QR Code) का सहारा लेकर लाखों रुपये की रकम शूटरों तक पहुंचाई। इस काम के लिए क्यूआर कोड उपलब्ध कराने वाले आम लोगों को महज 10 से 20 रुपये का मामूली कमीशन दिया जाता था।
हरियाणा से मुंबई तक फैले हवाला और डिजिटल नेटवर्क की जांच
क्राइम ब्रांच की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि हरियाणा के करनाल जिले से मुंबई में मौजूद शूटरों तक रकम ट्रांसफर करने के लिए इस अनोखे पैंतरे को अंजाम दिया गया। किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन से बचने और मुख्य बैंक खातों को पुलिस की नजर से दूर रखने के लिए सीधे पैसे भेजने के बजाय सड़क किनारे दुकान चलाने वाले छोटे व्यापारियों और ऑटो रिक्शा चालकों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से पैसा भेजने वाले और उसे नकद में भुनाने वाले के बीच का सीधा तकनीकी संपर्क पूरी तरह से छिपाने की चाल चली गई थी।
तीन शूटरों और विदेशी हैंडलर का मिला सुराग
जांच में फूल सिंह, रेहान और ऋतिक नामक तीन शूटरों की सीधी संलिप्तता पाई गई है। इन आरोपियों ने मुंबई पहुँचकर स्थानीय दुकानदारों को थोड़े से कमीशन का लालच देकर उनके क्यूआर कोड अपने कब्जे में लिए या उनकी तस्वीरें लीं। इसके पश्चात् विदेश में बैठे अनिल पंडित नाम के कथित गैंग ऑपरेटिव ने इन कोड्स को अपने भारत स्थित नेटवर्क और परिजनों तक पहुँचाया, जहाँ से सुनेहा पंडित नामक महिला द्वारा अलग-अलग किस्तों में पैसे स्कैन करके भेजे गए। पैसे खाते में जमा होते ही शूटर तुरंत संबंधित दुकानदार या ऑटो चालक से कमीशन काटकर बाकी रकम नकद के रूप में प्राप्त कर लेते थे।
मामूली कमीशन का लालच और वित्तीय कड़ियों की फॉरेंसिक पड़ताल
जांच के दौरान पुलिस के हाथ एक ऐसा उदाहरण लगा जिससे इस पूरे वित्तीय मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ। एक छोटे व्यापारी के क्यूआर कोड पर कुल 1,510 रुपये की डिजिटल राशि भेजी गई, जिसमें से दुकानदार को केवल 10 रुपये का कमीशन देकर शेष 1,500 रुपये नकद ले लिए गए। इसी तर्ज पर अनेक खातों का उपयोग करके बड़ी रकम शूटरों तक पहुँचाई गई। फिलहाल मुंबई पुलिस फॉरेंसिक जांच और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स की मदद से पैसे के इस अवैध प्रवाह की पूरी श्रृंखला जोड़ने में जुटी है। साथ ही इस बात की भी गहनता से पड़ताल की जा रही है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में क्रिप्टोकरेंसी अथवा पारंपरिक हवाला कारोबार का भी सहारा लिया गया था।



