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    अब खैर नहीं साइबर ठगों की! बिहार क्राइम ब्रांच ने किया बड़ा ऑपरेशन, 6 गिरफ्तार

    बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. EOU ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट से जुड़े 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इसका मुख्य सरगना 21 साल का हर्षित कुमार है, जिसे सुपौल के गौसपुर से दबोचा गया है. इसके साथ इस गिरोह के पांच अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है.जानकारी के मुताबिक यह अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट सिम बॉक्स का संचालन भी करता था. ये सभी सिम बॉक्स की मदद से रोजाना 10 हजार से अधिक फर्जी कॉल करते थे और इन कॉल की मदद से साइबर फ्रॉड किए जाते थे.

    ईओयू के एडीजी नैयर हसनैन खान ने बताया कि इस मामले की गहन तफ्तीश करने के लिए सीबीआई और आईबी की विशेष टीम भी जल्द पटना आने वाली है. चूंकि यह मामला कई राज्यों के अलावा विदेशों से जुड़ा हुआ है, तो ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी के साथ मिलकर पूरे मामले की तफ्तीश की जाएगी. पूरे गिरोह को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. अवैध संपत्ति भी जब्त की जाएगी.

    दो सप्ताह में ढाई करोड़ रुपये का नुकसान

    उन्होंने बताया कि इस पूरे गिरोह ने साइबर ठगी की बड़ी राशि को क्रिप्टो में तब्दील कर दी थी. इसी में वे आपस में लेनदेन करते थे. कई क्रिप्टो खातों और लेनदेन से जुड़े लिंक की जानकारी हासिल हुई है, जिसकी जांच चल रही है. केंद्रीय दूर संचार मंत्रालय से प्राप्त सूचना के अनुसार फर्जी तरीके से समानांतर एक्सचेंज की बदौलत फर्जी कॉल के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल करके पिछले सिर्फ दो सप्ताह में ढाई करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है. जबकि जनवरी से अब तक दूर संचार मंत्रालय को 60 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है.

    अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि हर्षित कुमार पिछले कुछ वर्षों में थाईलैंड, बैंककॉक समेत दर्जनभर देशों की यात्रा कर चुका है. इसका मोतिहारी में करोड़ों का मकान है. इसके एक बैंक खाते में 2.50 करोड़ रुपये जमा हैं, जिसे सील कर दिया गया है. यह बैंक खाता मोतिहारी में है. इसके पास 12 से 14 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्ति का पता चला है. इसके पास अलग-अलग नामों से 30 से 35 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें साइबर फ्रॉड की राशि का लेनदेन होती थी. फिलहाल दूरसंचार विभाग अपनी स्तर से क्षति के नुकसान का आंकलन करने में जुटा हुआ है.

    चीन, वियतनाम, कंबोडिया तक फैला था जाल

    इस सिम बॉक्स की मदद से वह फेसबुक समेत अन्य सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से चीन, वियतनाम, कंबोडिया समेत अन्य देशों के नागरिकों से संपर्क में था और इन्होंने एक टेलीग्राम ग्रुप बना रखा था. इन विदेशों सरगनाओं के साथ मिलकर वह साइबर ठगी का पूरा तंत्र चलाता था. इस गिरोह के तार पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गोआ, कर्नाटक, दिल्ली, उड़ीसा, झारखंड के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, कंबोडिया, थाईलैंड, हांगकांग, चीन, वियतनाम, यूके और जर्मनी समेत अन्य स्थानों से जुड़े हुए हैं.

    20 से 22 ठिकानों पर हुई छापेमारी

    ईओयू की टीम ने पटना, मोतिहारी, सुपौल, वैशाली, रोहतास समेत अन्य जिलों में कई अभियुक्तों के 20 से 22 ठिकानों पर छापेमारी की गई. ईओयू के स्तर से डीएसपी पंकज कुमार के नेतृत्व में गठित एसआईटी के स्तर से यह कार्रवाई की जा रही है. इन स्थानों पर छापेमारी के दौरान 8 सिम बॉक्स डिवाइस और सैकड़ों की संख्या में प्रमाणित, उपयोग किए और अनुपयोगी सीम कार्ड, कई बैंकों के पासबुक, एटीएम, क्रेडिट कार्ड समेत कई संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुए हैं. हर्षित ने वियतनाम से 4 और चीन से 4 सिम बॉक्स उपकरण की खरीद की है.

    झारखंड से मंगवाता था फर्जी सिम

    प्रारंभिक जांच में यह सामने आई कि सिम बॉक्स के माध्यम से 10 हजार से अधिक फर्जी कॉल एक दिन में ही किए जाते थे. इसकी मदद से कई तरह के साइबर अपराध किए जाते थे. हर्षित झारखंड से सबसे ज्यादा अवैध तरीके से एक्टिवेट किए गए फर्जी सिम कार्ड को मंगवाता था. मार्च से अब तक 1 हजार सिम कार्ड मंगवा चुका था. वहां के पाकुड़ से सर्वाधिक सिम कार्ड मंगवाए गए थे. हर्षित और सुल्तान की मुलाकात हाजीपुर में कई बार हुई थी और वहीं यह सिम की सप्लाई लेता था. सिम की आपूर्तिकर्ता टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर के डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ मिली-भगत करके इस गोरखधंधा को अंजाम देते थे. टेलीकॉम डिस्ट्रीब्यूटर्स आम लोगों की बॉयोमेट्रिक पहचान के आधार पर फर्जी सिम हासिल करते थे और वे इन्हें बेचते थे.

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