More
    Homeदुनियाअब चीन अमेरिका के गेराल्ड आर फोर्ड से भी बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट...

    अब चीन अमेरिका के गेराल्ड आर फोर्ड से भी बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट बनाएगा?

    बीजिंग। चीन का नई एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान नवंबर 2025 में आधिकारिक रूप से सेवा में शामिल हो गई है और इसे बीजिंग की तेजी से बढ़ती समुद्री ताकत का प्रतीक माना जा रहा है। करीब 80 हजार टन वजनी यह पोत चीन का पहला पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन वाला विमानवाहक पोत है, जिसमें आधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम लगे हैं। इसे दुनिया का सबसे बड़ा पारंपरिक ईंधन से संचालित युद्धपोत भी बताया गया, लेकिन हालिया तकनीकी आकलनों में इसके डिजाइन से जुड़ी खामियां सामने आई हैं। इन्हीं कमियों ने अब चीन को इससे कहीं बड़े और न्यूक्लियर एनर्जी पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर के विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर दिया है।
    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य विशेषज्ञों और स्वतंत्र विश्लेषकों के मुताबिक फुजियान की सबसे बड़ी समस्या इसके फ्लाइट डेक लेआउट से जुड़ी है। अमेरिकी सुपरकैरियर्स के विपरीत, फुजियान का ‘आइलैंड सुपरस्टक्चर’ फ्लाइट डेक के बीचों-बीच स्थित है, जबकि अमेरिकी जहाजों में इसे पीछे की ओर रखा जाता है। इस डिजाइन के कारण विमानों की पार्किंग और आवाजाही के लिए उपलब्ध जगह सीमित हो जाती है, जिससे तेज गति से उड़ान संचालन में बाधा आती है। नतीजतन, फाइटर जेट के टेक-ऑफ और डेक पर मूवमेंट के दौरान दिक्कतें सामने आ रही हैं।
    कैटापल्ट सिस्टम की स्थिति ने इन समस्याओं को और बढ़ा दिया है। फुजियान में मौजूद इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम भले ही अत्याधुनिक हो, लेकिन इनमें से एक कैटापल्ट लैंडिंग जोन में हस्तक्षेप करता है, जिससे लैंडिंग के समय उसका उपयोग संभव नहीं हो पाता। वहीं एक अन्य कैटापल्ट विमान लिफ्ट के बेहद पास स्थित है, जो एक ‘चोक पॉइंट’ बनाता है। माना जा रहा है कि निर्माण में भाप चालित कैटापल्ट से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम में बदलाव के कारण ये समझौते किए गए, जिनका सीधा असर पूरे फ्लाइट डेक ऑपरेशन पर पड़ा। इसके एंगल्ड फ्लाइट डेक की चौड़ाई और गहराई भी अमेरिकी डिजाइनों से कम बताई जा रही है, जिससे खराब मौसम और उबड़-खाबड़ समुद्री हालात में विमान उतारना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
    रिपोर्टों के मुताबिक इन समस्याओं की जड़ पारंपरिक ईंधन से चलने वाला प्रोपल्शन सिस्टम है। बड़े एग्जॉस्ट फनल और इंजन रूम के कारण आइलैंड और लिफ्ट की स्थिति सीमित हो जाती है, जिससे फ्लाइट डेक का प्रवाह बाधित होता है। इसके उलट न्यूक्लियर एनर्जी पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर में ऐसे भारी प्रोपल्शन सिस्टम की जरूरत नहीं होती। इससे डिजाइनरों को आइलैंड को पीछे खिसकाने, कैटापल्ट को बेहतर ढंग से लगाने और डेक को ज्यादा खुला बनाने की आजादी मिलती है। अब चीन अमेरिका के गेराल्ड आर फोर्ड क्लास से भी बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि फुजियान की कमियों से मिले अनुभव के आधार पर चीन अपनी अगली पीढ़ी के विमानवाहक पोत को ज्यादा सक्षम, तेज और रणनीतिक रूप से प्रभावी बनाने की कोशिश करेगा।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here