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    NSE का बड़ा फैसला: एक्साइड इंडस्ट्रीज और नुवामा वेल्थ अब F&O से बाहर

    मुंबई: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वायदा एवं विकल्प (F&O) सेगमेंट से दो प्रमुख कंपनियों को बाहर करने का बड़ा फैसला लिया है। एनएसई ने अधिसूचना जारी कर बताया कि एक्साइड इंडस्ट्रीज (Exide Industries) और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट (Nuvama Wealth Management) को डेरिवेटिव्स सेगमेंट से हटाया जा रहा है। दिए गए समाचार को बिना किसी बाहरी मीडिया संदर्भ के, नए शब्दों और सबहेडिंग्स के साथ नीचे व्यवस्थित किया गया है:

    29 जुलाई के बाद दोनों शेयरों में नहीं होगी F&O ट्रेडिंग

    एक्सचेंज द्वारा जारी बयान के मुताबिक, वर्तमान में चल रहे मई, जून और जुलाई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स अपनी तय एक्सपायरी तारीख तक सामान्य रूप से ट्रेड के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस दौरान नियमों के तहत नई स्ट्राइक प्राइस भी पेश की जा सकती हैं। हालांकि, इन मौजूदा सीरीज की समाप्ति के बाद दोनों कंपनियों के लिए कोई भी नया मंथली कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि 29 जुलाई, 2026 के बाद से इन दोनों सिक्योरिटीज में वायदा कारोबार पूरी तरह बंद हो जाएगा।

    सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के तहत लिया गया एक्शन

    NSE का यह कदम बाजार नियामक सेबी (SEBI) द्वारा अगस्त 2024 में जारी किए गए नए एलिजिबिलिटी फ्रेमवर्क पर आधारित है। सेबी ने मार्केट में होने वाले हेरफेर (Manipulation) को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए एफएंडओ सेगमेंट के नियमों को काफी सख्त कर दिया था। नए मानकों के अनुसार, किसी भी स्टॉक को डेरिवेटिव सेगमेंट में बने रहने या शामिल होने के लिए पिछले 6 महीनों के दौरान मार्केट कैपिटलाइजेशन और ट्रेडेड वैल्यू के मामले में देश के टॉप 500 शेयरों में शुमार होना अनिवार्य है।

    क्या हैं F&O की शर्तें और कब हो सकती है दोबारा एंट्री?

    बाजार के नियमों के तहत एफएंडओ लिस्ट में बने रहने के लिए कंपनियों को कुछ बेहद जरूरी पैमानों को पूरा करना होता है, जिनमें शामिल हैं:

    • MQSOS: मीडियन क्वार्टर-सिग्मा ऑर्डर साइज न्यूनतम ₹75 लाख होना चाहिए।

    • MWPL: मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट कम से कम ₹1,500 करोड़ की होनी जरूरी है।

    • ADDV: एवरेज डेली डिलीवरी वैल्यू का ₹35 करोड़ होना अनिवार्य है।

    जो भी शेयर इन मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें इस सेगमेंट से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है। नियम के अनुसार, एक बार बाहर होने के बाद इन स्टॉक्स को कम से कम एक साल के लिए दोबारा शामिल नहीं किया जा सकता। एक साल की अवधि बीतने के बाद, यदि ये स्टॉक्स लगातार छह महीनों तक इन सभी शर्तों को पूरा करते हैं, तभी इनकी वापसी पर विचार किया जा सकता है।

    बाजार का हाल: रिकॉर्ड तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुए सूचकांक

    इस बड़ी खबर के बीच, 22 मई को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद होने में कामयाब रहे। सेंसेक्स 0.31 फीसदी (231 अंक) की बढ़त दर्ज करते हुए 75,415 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.27 फीसदी (64 अंक) चढ़कर 23,719 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बैंकिंग सेक्टर में अच्छी रौनक रही और बैंक निफ्टी 1.15 फीसदी उछलकर बंद हुआ। अन्य शेयरों की बात करें तो वरुण बेवरेजेज में 3.77 फीसदी की तेजी देखी गई, जबकि मैक्स हेल्थकेयर का शेयर 6 फीसदी से ज्यादा टूटकर बंद हुआ।

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