नई दिल्ली | 'विकसित भारत' के बड़े विजन को समय पर पूरा करने, कामकाज की रफ्तार बढ़ाने और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी पहल की है। गुरुवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की करीब पांच घंटे लंबी मैराथन बैठक में पीएम मोदी ने नौकरशाही के कामकाज के तौर-तरीकों की गहन समीक्षा की। इस बैठक में मंत्रालयों में अटकी फाइलों, अधिकारियों के विदेशी दौरों और अदालतों में लंबित सरकारी मुकदमों की विस्तृत रिपोर्ट ली गई। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि प्रशासनिक सुधार ही विकसित भारत की असल बुनियाद हैं और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्रालयों की कार्यप्रणाली और फाइलों की स्थिति का ऑडिट
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के सामने एक विशेष प्रेजेंटेशन (प्रस्तुति) रखी गई, जिसमें मंत्रालयवार कामकाज का पूरा लेखा-जोखा था। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने इस बात की बारीकी से जानकारी ली कि संयुक्त सचिव, सचिव और राज्य मंत्रियों के स्तर पर कोई भी फाइल औसतन कितने दिनों तक दबी रहती है। इसके अलावा, बैठक में अधिकारियों के विदेशी दौरों का मुद्दा भी गरमाया। पीएम को बताया गया कि किस मंत्रालय के अधिकारियों ने कितनी बार विदेशों की यात्राएं कीं और किन अफसरों ने तय सीमा से ज्यादा उड़ानें भरीं। साथ ही, विभिन्न विभागों से जुड़े अदालती मामलों और उन्हें सुलझाने के लिए अब तक किए गए प्रयासों की भी समीक्षा की गई।
'सुधार एक्सप्रेस' की रफ्तार बढ़ाने और उत्सव मनाने का आह्वान
अपनी सरकार की कार्यशैली को 'सुधार एक्सप्रेस' का नाम देते हुए प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों और विभागों को बदलाव की गति तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिना व्यापक और त्वरित सुधारों के देश को विकसित बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता। पीएम ने मंत्रालयों को 'सुधार उत्सव' मनाने की सलाह दी, जिसके तहत राज्यों, विषय विशेषज्ञों और आम जनता से संवाद कर व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक सुधारों का एकमात्र मकसद आम जनता की दिक्कतों और परेशानियों को कम करना होना चाहिए।
पुरानी कार्यशैली छोड़ नया सोचने और करने की नसीहत
बैठक में ऊर्जा, स्वास्थ्य, श्रम, वाणिज्य और वन एवं पर्यावरण समेत 11 प्रमुख मंत्रालयों ने 'ईज ऑफ डूइंग' (कामकाज की सुगमता) को लेकर अपनी मौजूदा रणनीतियों और भविष्य के रोडमैप को पेश किया। मंत्रियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि अब पुराना और रटा-रटाया ढर्रा बिल्कुल नहीं चलेगा। हर मंत्रालय को लीक से हटकर नई सोच के साथ काम करना होगा। उन्होंने लंबित कानूनी मामलों को जल्द से जल्द निपटाने की हिदायत देते हुए कहा कि सरकार के भीतर एक नई और आधुनिक कार्य संस्कृति को हर हाल में लागू करना होगा।


